नीतीश के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री: उत्तराधिकार का प्लान या जेडीयू को एकजुट रखने की मजबूरी? जानें


Nitshant kumar and Nitish kumar- India TV Hindi
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निशांत कुमार और नीतीश कुमार

नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। नीतीश कुमार अब राज्य का नेतृत्व छोड़ राज्य सभा जाने की तैयारी कर चुके हैं जबकि उनके बेटे निशांत ने औपचारिक तौर पर रविवार को पटना में आयोजित एक भव्य समारोह में जनता दल यूनाइटेड की सदस्यता ग्रहण की। एक ओर जहां निशांत की एंट्री को नीतीश के उत्तराधिकार के प्लान के रूप में समझा जा रहा है तो वहीं इसे जेडीयू को एकजुट रखने की मजबूरी भी माना जा रहा है। आइये इस लेख में हम इसे समझने की कोशिश करते हैं।

निशांत की एंट्री ने क्यों चौंकाया?

नीतीश कुमार ने हमेशा राजनीति में परिवार का विरोध किया। परिवारवाद को लेकर वे अक्सर अपने मित्र लालू प्रसाद पर भी आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन अचानक उनके बेटे निशांत की एंट्री ने लोगों को चौंकाया भी है। निशांत सालों तक कैमरे और सक्रिय राजनीति से दूर रहे। लेकिन अचानक सत्ता के केंद्र में उनका आना एक संयोग नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी काफी अहम है। 

उत्तराधिकार सौंपने की योजना 

निशांत की राजनीति में एंट्री इस बात को पुख्ता करती है कि नीतीश कुमार अब अपने उत्तराधिकार की योजना को आखिरी रूप दे रहे हैं। अंदरखाने यह माना जाता है कि नीतीश कुमार का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है और ऐसी हालत में मुख्यमंत्री के पद पर बने रहना उचित नहीं है। लेकिन सवाल यही कि अगर नीतीश नहीं तो फिर कौन? निशांत राजनीतिक तौर पर कभी एक्टिव नहीं रहे। वहीं जनता दल यूनाइडेट में नीतीश ने अपने सिवा नेताओं की कोई सेकेंड लाइन भी नहीं बनाई। ऐसे में अब जनता दल यूनाइटेड नीतीश की जगह नए चेहरे की भी तलाश थी। यूं तो पार्टी के अंदर संजय झा और ललन सिंह जैसे नेता भी हैं लेकिन कार्यकर्ताओं में नीतीश कुमार जैसा भरोसा इनमें नजर नहीं आता। ऐसे में निशांत को सामने लाया गया।

नीतीश की सुशासन की छवि जेडीयू का आधार

जनता दल यूनाइटेड का पूरा आधार नीतीश कुमार के सुशासन की छवि पर टिकी हुई है। ऐसे में निशांत को आगे लाकर पार्टी यह संदेश भी देना चाहती है कि नीतीश की स्वच्छ राजनीति का वारिस कोई और नहीं बल्कि उनका बेटा निशांत ही है। क्योंकि कार्यकर्ताओं की भावना भी निशांत के साथ जुड़ी हुई थी। कार्यकर्ता भी मांग कर रहे थे अगर नीतीश सीएम नहीं रहेंगे तो उनकी जगह निशांत को सामने लाया जाए। फिलहाल नई सरकार में उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है ताकि शासन पर नीतीश की पकड़ और ब्रैंड नीतश की निरंतरता बनी रहे।

मजबूरी और समय की जरुरत

दरअसल, यह फैसला पार्टी के अंदर काफी सोच समझकर लिया गया। नीतीश को गिरते स्वास्थ्य के चलते पहले की तरह काम कर पाने की ऊर्जा नहीं मिल पा रही है। इसलिए पार्टी  के अंदर उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला लिया गया। खुद नीतीश भी कई बार यह कह चुके हैं  कि वे कभी इस उच्च सदन का सदस्य नहीं रहे और उनकी इच्छा है कि वे एक बार राज्यसभा में जाएं। लेकिन नीतीश के बाद कोई और चेहरा ही नहीं था जो नीतीश के उत्तराधिकार को भी संभाले और पार्टी को एकजुट भी रख सके। ऐसे में निशांत को पार्टी के अंदर सक्रिय भूमिका सौंपना जनता दल यूनाइटेड की मजबूरी भी थी और समय की जरूरत भी।





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