अमेरिका उठा रहा बड़ा कदम, पेशावर में हमेशा के लिए बंद कर रहा अपना दूतावास; जानें वजह


US Consulate in Pakistan- India TV Hindi
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US Consulate in Pakistan

America Pakistan Peshawar Consulate: अमेरिका पेशावर में अपना वाणिज्य दूतावास स्थायी रूप से बंद करने जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस हफ्ते कांग्रेस को इसकी सूचना दी है। एसोसिएटेड प्रेस को मिली नोटिफिकेशन की कॉपी के अनुसार, इस कदम से विभाग को हर साल 7.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 63 करोड़ रुपये) की बचत होगी। विभाग का कहना है कि इससे पाकिस्तान में अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को बढ़ावा देने की क्षमता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। यह फैसला ट्रंप प्रशासन के समय से चल रही फेडरल एजेंसियों को छोटा करने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जो एक साल से ज्यादा समय से विचाराधीन था। 

ईरान की वजह से नहीं लिया गया फैसला

अमेरिका के इस फैसले का ईरान जंग या हाल ही में वहां हुए विरोध प्रदर्शनों से कोई लेना-देना नहीं है, हालांकि पिछले दिनों ईरान से जुड़े मुद्दों पर कराची, पेशावर समेत कई शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। विरोध प्रदर्शनों की वजह से कुछ समय के लिए कॉन्सुलेट का कामकाज जरूर प्रभावित हुआ था। पेशावर कॉन्सुलेट में फिलहाल 18 अमेरिकी डिप्लोमैट और सरकारी कर्मचारी समेत 89 स्थानीय स्टाफ काम करते हैं।

कितना होगा खर्च?

पेशावर कॉन्सुलेट बंद करने में अमेरिकी विदेश विभाग के लगभग 3 मिलियन डॉलर खर्च होंगे, जिसमें से आधे से ज्यादा (1.8 मिलियन डॉलर) आर्मर्ड ट्रेलरों (जो अस्थायी ऑफिस के रूप में इस्तेमाल हो रहे थे) को दूसरी जगह शिफ्ट करने में लगेंगे। बाकी राशि वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, टेलीकॉम सामान और फर्नीचर को इस्लामाबाद की अमेरिकी एम्बेसी तथा कराची-लाहौर के अन्य कॉन्सुलेट में ट्रांसफर करने में इस्तेमाल होगी।

पेशावर कॉन्सुलेट क्यों है अहम?

पेशावर कॉन्सुलेट अफगानिस्तान बॉर्डर के नजदीक होने के कारण अहम है। यह अफगानिस्तान से आने-जाने का मुख्य रास्ता और अमेरिकी नागरिकों समेत मदद मांगने वाले अफगानों के लिए संपर्क बिंदु रहा है। अब सभी कॉन्सुलर सेवाएं (जैसे वीजा, अमेरिकी नागरिकों की मदद आदि) इस्लामाबाद की अमेरिकी एम्बेसी संभालेगी, जो पेशावर से करीब 184 किलोमीटर दूर है।

इस्लामाबाद एम्बेसी से होंगे काम

अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस बंदी से अमेरिकी हितों की रक्षा, नागरिकों की सहायता या विदेशी सहायता कार्यक्रमों की निगरानी पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि ये सभी काम इस्लामाबाद एम्बेसी से जारी रहेंगे। यह पहला ऐसा विदेशी डिप्लोमैटिक मिशन है जिसे विभाग के रीऑर्गेनाइजेशन के कारण पूरी तरह बंद किया जा रहा है।

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