Middle-East की जंग में सऊदी अरब और ईरान के बीच फंसे शहबाज-मुनीर, पाकिस्तान गया “तेल लेने”


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ(बाएं) और आर्मी चीफ असीम मुनीर (दाएं)- India TV Hindi
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ(बाएं) और आर्मी चीफ असीम मुनीर (दाएं)

इस्लामाबादः मिडिल-ईस्ट में छिड़ी भीषण जंग के बीच पाकिस्तान बहुत बुरा फंस गया है। पाकिस्तान में तेल और गैस की भारी किल्लत हो गई है। इससे माल-ढुलाई भाड़ा भी बढ़ गया है, जिससे खाने-पीने की वस्तुओं के दाम आसमान छूने लगे हैं। ऐसे वक्त में पाकिस्तान डबल गेम खेल रहा है? एक तरफ वह ईरान से तेल लेने के लिए दोस्ती बनाए रखने का दंभ खेल रहा है तो दूसरी तरफ सऊदी अरब को ईरानी हमले के खिलाफ सुरक्षा का भरोसा देकर आर्थिक मदद लेने मुनीर और शहबाज दुबई पहुंच गए हैं। इस वक्त पाकिस्तान को तेल और गैस की सख्त जरूरत है। इसलिए वह शहबाज और मुनीर आर्थिक मदद के साथ तेल लेने सऊदी अरब के दरवाजे पर हैं। 

मिडिल-ईस्ट में भीषण जंग से पाकिस्तान पस्त

अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच फरवरी 2026 से शुरू हुई यह जंग अब पूरे मिडिल-ईस्ट को अपनी चपेट में ले चुकी है। खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावित करने वाले तेल टैंकरों पर हमले तेज कर दिए हैं, और चेतावनी दी है कि अमेरिका व उसके सहयोगियों को फायदा पहुंचाने वाला एक भी लीटर तेल नहीं गुजरेगा। बीते 36 घंटों में आईआरजीसी ने 5 क्रूड ऑयल टैंकरों को नष्ट कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया है और कीमतें आसमान छू रही हैं। 

सऊदी की तिजोरी से कब तक पलेगा पाकिस्तान का पेट?

इस संकट में पाकिस्तान की स्थिति बेहद नाजुक है। एक तरफ आर्थिक बदहाली और कंगाली की मार झेल रहा पाकिस्तान सऊदी अरब की तिजोरी पर निर्भर है, तो दूसरी तरफ ईरान से तेल की जरूरतें पूरी करने के लिए रिश्ते बनाए रखना चाहता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सऊदी सहायता पर टिकी हुई है। सऊदी अरब पाकिस्तान को अरबों डॉलर का कर्ज, तेल क्रेडिट और रेमिटेंस देता रहा है। ऐसे में पाकिस्तान का सऊदी के साथ खड़ा होना मजबूरी बन चुका है। पाकिस्तान और सऊदी अरब ने सितंबर 2025 में स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट साइन किया था, जिसमें एक पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा। इस जंग में ईरान के सऊदी पर हमलों के बाद यह समझौता पहली बार असली टेस्ट में है।

मुनीर ने की सऊदी अरब के रक्षामंत्री से मुलाकात

 पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने 7 मार्च को रियाद जाकर सऊदी डिफेंस मिनिस्टर प्रिंस खालिद बिन सलमान से मुलाकात की और ईरानी हमलों को रोकने के लिए संयुक्त कदमों पर चर्चा की। पाकिस्तान के पीएम के प्रवक्ता मुशर्रफ जैदी ने कहा कि “पाकिस्तान सऊदी अरब की मदद के लिए हर हाल में तैयार है, कोई सवाल ही नहीं कि हम कब और कैसे मदद करेंगे।” मुनीर ने सऊदी को सुरक्षा की गारंटी दी है, क्योंकि सऊदी पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान ईरान से भी रिश्ते नहीं तोड़ना चाहता। ईरान पाकिस्तान की डीजल जरूरतों का करीब 35% हिस्सा सप्लाई करता था। 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रभावित होने से ईरान से तेल की सप्लाई बंद हो गई है। नतीजा? पाकिस्तान में भारी फ्यूल किल्लत है। 7 मार्च को सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की, जिससे पेट्रोल 321.17 रुपये और डीजल 335.86 रुपये प्रति लीटर हो गया। यह बढ़ोतरी लगभग 20% है, जो इतिहास की सबसे बड़ी एकल बढ़ोतरी है।

कराची से इस्लामाबाद तक पेट्रोल पंपों पर कतारें

हालत यह है कि पाकिस्तान में कराची से इस्लामाबाद तक पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगीं हैं। जरूरी सामानों की सप्लाई ठप हो गई है, महंगाई आसमान छू रही है। पहले से महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे पाकिस्तानी अब और बुरी हालत में हैं। ट्रांसपोर्ट किराया, कमोडिटी कीमतें सब बढ़ गए हैं। इस बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई को बधाई दी है। उन्होंने X पर लिखा कि “मैं आयतुल्लाह मुज्तबा खामेनेई को ईरान के सुप्रीम लीडर बनने पर बधाई देता हूं और उनके पिता की मौत पर संवेदना व्यक्त करता हूं। उम्मीद है कि वे ईरान को शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर ले जाएंगे।” यह बधाई ऐसे समय में आई जब अमेरिका-इज़राइल ने अली खामेनेई को मार गिराया था। शहबाज शरीफ ने ईरान के साथ करीबी सहयोग की बात भी कही।यह डबल गेम पाकिस्तान की मजबूरी है। 

शहबाज भी पहुंचे सऊदी अरब

मुनीर के बाद अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी बृहस्पतिवार को सऊदी अरब के संक्षिप्त आधिकारिक दौरे पहुंच गए हैं। वह सऊदी अरब से संकट की इस घड़ी में मदद चाहते हैं। मगर वह दो राहे पर खड़ा है। एक तरफ पाकिस्तान ईरान के साथ अपने अच्छे संबंधों और भौगोलिक निकटता के कारण उससे रिश्ते बनाने रखने को मजबूर है तो दूसरी ओर वह सऊदी अरब से हुए समझौते के तहत इस युद्ध में कूदने को विवश हो सकता है। फिलहाल प्रधानमंत्री शहबाज सऊदी क्राउन प्रिंस से मुलाकात करेंगे, जिसमें वे “क्षेत्र में जारी तनाव, क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर विचार-विमर्श करेंगे। 

पाकिस्तान ने सऊदी से मांगी 10 अरब डॉलर की मदद

सऊदी से पाकिस्तान ने 10 अरब डॉलर की मदद मांगी है। इसमें उसके पुराने 5 अरब डॉलर डिपॉजिट को 10 साल की लंबी अवधि में बदलना, डिफर्ड ऑयल पेमेंट को 1.2 अरब से बढ़ाकर 5 अरब करना, और रेमिटेंस बढ़ाना शामिल है। सऊदी पाकिस्तान की आर्थिक बैकबोन है, इसलिए मुनीर सऊदी के साथ हैं, लेकिन तेल के लिए ईरान से दोस्ती बनाए रखनी है। पाकिस्तानी मीडिया में इस डबल गेम की खिंचाई हो रही है। एक तरफ सऊदी को सुरक्षा का वादा, दूसरी तरफ ईरान के नए लीडर को बधाई। पाकिस्तान की कोशिश है कि वह दोनों तरफ से फायदा उठाए, लेकिन जंग की आग फैलने से उसकी अपनी अर्थव्यवस्था जल रही है। फ्यूल किल्लत, महंगाई, और क्षेत्रीय दबाव से पाकिस्तान धर्मसंकट में फंसा है कि वह सऊदी या ईरान में से किसके साथ जाए?

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