
प्राण
बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन विलेन्स की बात की जाएगी तो प्राण का नाम सबसे पहले आएगा। प्राण फिल्मी दुनिया का एक ऐसा सितारा जिसने खलनायकी की ऐसी मिसाल पेश की कि आज भी लोग उन्हें याद करते हैं। प्राण वो विलेन जो अपने समय के सुपरस्टार दिलीप कुमार को भी टक्कर देते थे। दिल्ली की बल्लीमारान की पेचीदा गलियों में पैदा हुआ ये सितारा सिनेमाई दुनिया पर ऐसी छाप छोड़ गया कि सदियों तक याद रखा जाएगा।
फोटोग्राफी के चलते सिनेमा में हुई एंट्री
लेकिन प्राण ने फिल्मी दुनिया में एक स्टार के रूप में शुरुआत नहीं की थी। 19 वर्षीय प्राण, जिन्हें स्थिर फोटोग्राफी का शौक था और विभाजन से पहले लाहौर में एक फोटोग्राफर के सहायक के रूप में कार्यरत थे, ने कभी अभिनय में आने की योजना नहीं बनाई थी। लेकिन 1939 में एक रात, नियति ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था, क्योंकि एक दुकान पर खड़े होकर किसी प्रकार के खतरे के साथ पान चबाने मात्र से ही लेखक वली मोहम्मद वली का ध्यान उनकी ओर आकर्षित हो गया, जो फिल्म निर्माता दलसुख एम पंचोली के साथ अपनी पंजाबी फिल्म यमला जट पर काम कर रहे थे।
इस फिल्म ने बनाया सुपरस्टार विलेन
यमला जट (1940), जिसमें दुर्गा खोटे और नूरजहां ने बाल कलाकार के रूप में अभिनय किया था, एक बड़ी सफलता साबित हुई और प्राण को पर्दे पर खलनायकी के लिए जाना जाने लगा, हालांकि उन्हें अपना किरदार थोड़ा बेतुका लगा। उन्हें कई फिल्मों के प्रस्ताव मिलने लगे, लेकिन खानदान (1942) से हिंदी फिल्मों में अपनी शुरुआत के बाद, जिसमें उन्होंने नूरजहां के साथ एक रोमांटिक हीरो की भूमिका निभाई, उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिला। हालाँकि यह फिल्म सिल्वर जुबली हिट रही, लेकिन प्राण को पेड़ों के इर्द-गिर्द भागना पसंद नहीं था, जो आमतौर पर एक हीरो की भूमिका में होता है।
खुद को गानों में पसंद नहीं थे प्राण
प्राण अपनी बायोग्राफी में बताते हैं, ‘मुझे गानों में खुद पसंद नहीं था। इसलिए, मैंने ऐसी फिल्में करने का फैसला किया जिनमें या तो कोई गाना न हो या मुझ पर फिल्माए जाने वाले गाने कम हों। इसके अलावा, अपनी नायिका के पीछे पेड़ों के इर्द-गिर्द भागना एक ऐसी चीज थी जिसमें मैं कभी सहज नहीं था।’ यही वजह रही कि उन्होंने अपने करियर में आगे चलकर सकारात्मक किरदारों की बजाय खलनायक की भूमिकाएं चुनीं। अपने एक साक्षात्कार में अभिनेता ने नायक की बजाय खलनायकों को तरजीह देने का एक और कारण बताया, ‘कुछ भूमिकाओं को छोड़कर, सभी नायक एक जैसे दिखते हैं। और खलनायक ही नायक को उभारता है। जब तक आप बुराई को नहीं जानते, तब तक अच्छाई को कैसे पहचानेंगे? कंस की वजह से ही हम कृष्ण को जानते हैं, रावण की वजह से ही हम राम को जानते हैं।’
बल्लीमारन की पेचीदा गलियों से निकले और बने स्टार
प्राण का 12 फरवरी 1920 को जन्म हुआ था और 93 साल की सुंदर जिंदगी जी थी। साल 2013 में उनका निधन हो गया था। लेकिन अपने करियर के 4 दशक तक प्राण फिल्मी दुनिया पर राज करते रहे। विलेन से लेकर साधार किरदारों में भी जान फूंक देते थे। दिलीप कुमार से लेकर धर्मेंद्र और ज्यादातर सुपरस्टार्स को कड़ी टक्कर देने वाले प्राण के कई किरादर ऐसे हैं जो आज भी अमर हैं।
