
गंदे विचार को कैसे दूर करें- प्रेमानंद महाराज
मन विचलित करता है। कई बार मन में बुरे ख्याल आते हैं। गंदे विचार आने लगते हैं और मन भटकने लगता है। ऐसा करने से कई बार इंसान नेगेटिव विचारों से घिर जाता है। ज्यादातर लोगों के साथ ऐसा होता है। कई बार पूजा पाठ करते हुए मन में बुरे ख्याल आने लगते हैं। भजन कीर्तन और अध्यात्म की राह पर चलते हुए मन भटकने लगता है। उल्टे सीधे ख्याल आने लगते हैं। यही सवाल प्रमानंद महाराज से एक भक्त ने पूछा कि मन में गंदे ख्याल आएं और मन भटकने लगे तो क्या करना चाहिए?
भक्त के इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज ने बताया कि ऐसा क्यों होता है। प्रेमानंद महाराज ने बताया कि संसार का मनोरंजन मन को प्रिय लगता है। मन की गलती नहीं है हम उसे जहां लगाते हैं वहीं वो लगने लगता है। अब अध्यात्म मार्ग में मन लगा रहे हैं तो इसमें जहां-जहां भटकता है।
मन को वश में करना जरूरी है
मन ने 5 इंद्रियों में विचरने का स्वभाव बना लिया है। अध्यात्म में मन को वश में किया जाता है लेकिन अभी तक आप मन के वश में रहे हैं। तो जब आप मन का साथ नहीं देंगे तो वो आपका साथ देने लगेगा। क्योंकि आप नहीं चाहें तो मन कुछ नहीं कर सकता है। जैसे मन कह रहा है मैं देखूं और हम कह रहे हैं नहीं देखना है। मन सौ बार कहेगा देखो लेकिन नहीं आप कहेंगे ये देखो तो फिर वो वहां लगने लगेगा। हालांकि शुरुआत में ऐसा सिर्फ कुछ देर के लिए होगा। जिसके बाद फिर आपका मन आपको वश में करने की कोशिश करेगा और जब आप मन के वश में नहीं आएंगे, तो वह आपको जलाने की कोशिश करेगा। ऐसे में अगर आप मन की उस जलन को सह लेते हैं, तो इसका मतलब ये है कि आपने मन वश में कर लिया है और अगर नहीं करते हैं तो मन ने आपको वश में कर लिया है।
मन को चेला बना लेंगे तो आप गुरु बन जाएंगे
मन को चेला बना लें तो आप गुरु बन जाएंगे। लेकिन आज लोग मन के वश में और मन जो कहता है वैसे ही चलते हैं। लेकिन अगर आपको सही रास्ते पर चलना है, अध्यात्म के रास्ते पर आना है तो मन को चेला बनाना होगा जैसा आप कहें मन वही करेगा तो आप महात्मा बनने की ओर जा सकते हैं। मन की अधीनता से मुक्त होना बड़ा कठिन होता है। कोई विरला ही ऐसा कर पाता है।
