कौन-कौन सी मेडिकल कंडीशन बाल झड़ने का कारण बन सकती हैं? बता रहे हैं एक्सपर्ट


बाल झड़ने का रीजन - India TV Hindi
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बाल झड़ने का रीजन

आजकल लोगों का हेयर फॉल बहुत तेजी से हो रहा है। बालों के झड़ने और गंजेपन के पीछे सबसे बड़ी वजह खराब जीवनशैली और खानपान को माना जाता है। बच्चों से लेकर युवाओं में यह समस्या बहुत तेजी से देखने को मिल रही है। ऐसे में हेयर फॉल को कंट्रोल करने के लिए लोग महंगे महंगे ट्रीटमेंट से लेकर कई घरेलू नुस्खें आज़माते हैं मगर परेशानी जस की तस बनी रहती है। लेकिन, क्या आप जानते हैं हेयर फॉल के पीछे सिर्फ यही कारक ज़िम्मेदार नहीं है बल्कि कई मेडिकल कंडीशन्स की वजह से भी बाल तेजी से झड़ने लगते हैं। इंडिया टीवी से बात करते हुए हेयर स्पेशलिस्ट डॉ. जांगिड़ ने बताया कि बाल झड़ने के पीछे कौन कौन सी मेडिकल कंडीशन ज़िम्मेदार है। 

 

इन मेडिकल कंडीशन की वजह से झड़ने लगते हैं बाल

परमानेंट हेयर लॉस:

  • मेल पैटर्न बाल्डनेस: मेल पैटर्न बाल्डनेस एक हार्मोनल कंडीशन है। इस स्थिति में पुरुषों के बाल आगे से झड़ना शुरू होता है। यह एक खास पैटर्न है। माथे पर ‘M’ शेप में हेयरलाइन बनता है और पीछे से बाल हटना शुरू हो जाता है। सिर के ऊपरी हिस्से यानी क्राउन सेक्शन पर पर भी गंजापन बढ़ने लगता है। यह स्थिति ज़्यादातर स्थाई होती है । 

  • फीमेल पैटर्न बाल्डनेस: फीमेल पैटर्न बाल्डनेस के कंडीशन को एंड्रोजेनिक एलोपेसिया कहते हैं। इस कंडीशन में महिलाओं में गंजेपन की समस्या बढ़ती है। इस स्थिति में सिर के ऊपरी हिस्से यानी क्राउन सेक्शन पर बालों के डेंसिटी कम होने लगती है और वहां पैचेस दिखने लगते हैं। यह जेनेटिक्स, हार्मोनल चेंजेस की वजह से भी होता है। 

  • ट्रॉमा हेयर लॉस: ट्रॉमा हेयर लॉस का मतलब है किसी तरह के फिजिकल या मेंटल ट्रॉमा के कारण बालों का उसपर बुरा असर पड़ना। इस स्थिति में बाल तेजी से झड़ने लगते हैं। 

  • लाइकेन प्लानोपिलारिस: लाइकेन प्लानोपिलारिस में इम्यून सिस्टम गलती से आपके बालों पर हमला करता है। इस वजह से स्कैल्प में सूजन आने लगता है और वहां के बाल पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं। इस बीमारी में गंजेपन की समस्या स्थाई होती है। 

टेंपरेरी हेयर लॉस:

  • एलोपेशिया एरियाटा कंडीशन: एलोपेशिया एरियाटा में भी इम्यून सिस्टम गलती से बालों के रोमों पर हमला करता है, जिससे बाल झड़ने लगत है और वहां पैचेस बनने लगता है। लेकिन इस मेडिकल  कंडीशन में स्थायी गंजापन नहीं होता है। यानी बाल दोबारा उगाए जा सकते हैं।

  • स्ट्रेस की वजह से हेयर लॉस: तनाव ज़्यादा लेने से कॉर्टिसोल हार्मोन शरीर में तेजी से बढ़ता है जो सिर्फ मानसिक रूप से ही आपको बीमार नहीं करता है। इस वजह से बालों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है और वे झड़ने लगते यहीं। हालांकि, यह अस्थायी हो सकता है।

  • प्रेग्नेंसी में हेयर लॉस: प्रेग्नेंसी में बाल झड़ना आम है, मुख्य रूप से गर्भावस्था के बाद में हार्मोनल बदलावों के कारण हेयर लॉस होता है। हालांकि यह स्थिति अस्थायी होती है।

  • आयरन डेफिशियंसी: जब शरीर में आयरन की कमी होती है तो हीमोग्लोबिन कम बनता है, जिससे बालों की जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती और इसकी कमी के कारण बाल कमजोर होकर तेजी से झड़ने लगते हैं।

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