
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (बाएं) बीच में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और दाएं पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर।
Iran Violence: ईरान में हफ्तों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन ने नये युद्ध की आशंका को जन्म दे दिया है। ईरान ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोगों को अल्लाह के खिलाफ जंग छेड़ने का दोषी ठहरा कर फांसी पर लटकाने का फैसला सुना दिया है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के इस सख्त फैसले ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। वहीं अमेरिका ने खामेनेई को उनके इस फैसले के खिलाफ बड़ी धमकी दे डाली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि वह ईरान के साथ हैं और अगर प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई तो अमेरिका ईरान पर हमला कर देगा। ट्रंप की इस धमकी से सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान भी घबरा गया है। आइये आपको बताते हैं कि पाकिस्तान ट्रंप के इस ऐलान से क्यों मुश्किल में फंस गया है?
ईरान पर हमले के अमेरिकी ऐलान से क्यों डरा पाकिस्तान
ईरान पर अमेरिका द्वारा हमले की धमकी दिए जाने से पाकिस्तान में डर और चिंता का माहौल है। इसका कारण पूरी तरह कूटनीतिक बताया जा रहा है। सीएनएन न्यूज 18 के सीनियर सिक्योरिटी सोर्सेज के अनुसार अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। ट्रंप ने ईरानियों को आश्वासन देते हुए कहा है कि वह घबराएं नहीं, क्योंकि मदद रास्ते में है और अमेरिका प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा है। इससे ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका प्रबल हो गई है। ऐसे में पाकिस्तान अब यह फैसला नहीं कर पा रहा है कि वह मुस्लिम देश होने के नाते ईरान का साथ दे या फिर राष्ट्रपति ट्रंप के साथ खड़ा हो। पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर को सबसे बड़ी मुश्किल और आशंका इस बात को लेकर है कि ईरान पर हमले की स्थिति में अमेरिका पाकिस्तान से ईरान फ्रंट खोलने का आदेश दे सकते हैं यानी वह पाकिस्तानी सेना की मदद मांग सकते हैं। ऐसे में पाकिस्तान क्या करेगा?
मुनीर ने की आपात बैठक
ईरान पर हमले को लेकर जारी ट्रंप के फरमान के मद्देनजर पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने आपात बैठक की है। इस दौरान उन्होंने अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले से पैदा होने वाली तमाम परिस्थितियों का आकलन किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस बैठक में मुनीर के साथ पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के चीफ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार असीम मलिक, दक्षिणी कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल राहत नसीम, मिलिट्री इंटेलीजेंस डायरेक्टर जनरल, सीओएएस के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ समेत आईएसआई के डायरेक्टर जनरल व अन्य टॉप अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान यह चर्चा की गई कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो पाकिस्तान उस वक्त क्या करेगा और किसका साथ देगा?
पाकिस्तान के सामने क्या है मुश्किल
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और असीम मुनीर के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो वह किसके पक्ष में खड़ा होगा। अगर वह ट्रंप का साथ देता है तो ईरान समेत अन्य इस्लामिक मुल्कों से दुश्मनी मोल लेगा और पाक अमेरिका का साथ देने से इनकार करता है तो वह ट्रंप के निशाने पर आ जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान के सामने एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाईं वाली स्थिति है। ऐसे मुश्किल हालात की कल्पना मात्र से ही पाकिस्तान को पसीने छूट रहे हैं। ईरान पर हमले की स्थिति में पाकिस्तान को आशंका यह भी है कि उसके यहां ईरानी शरणार्थी बड़ी संख्या में आ सकते हैं। पाकिस्तान ईरान फ्रंट खोलता है तो बलूचिस्तान इलाके से आतंकी हमले और तेज हो सकते हैं। क्योंकि बलूचिस्तान की सीमा ईरान से लगती है। दूसरी बड़ी चिंता यह भी है कि ईरान पर हमले कि लिए अगर अमेरिका ने पाकिस्तान का एयरबेस मांगा तो शहबाज और मुनीर क्या करेंगे?
