Economic Survey 2025-26: रुपया कहां से आता है और कहां चला जाता है, समझें कैसे चलता है देश


सरकार अपने इनकम में से 6 प्रतिशत राशि बड़ी सब्सिडी देने में खर्च करती है।- India TV Paisa

Photo: PIXABAY सरकार अपने इनकम में से 6 प्रतिशत राशि बड़ी सब्सिडी देने में खर्च करती है।

भारत की अर्थव्यवस्था का धारा-चित्र अक्सर जटिल लगता है, लेकिन इसके पीछे एक सटीक गणित और फ्लो है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में रुपया कहां से आता है और कहां जाता है, इसका पूरा हिसाब पेश किया गया है। यह कैलकुलेशन न केवल यह बताता है कि देश में पैसे की आवक-जावक कैसे होती है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि निवेश, उपभोग, निर्यात-आयात और सरकारी खर्च के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था कैसे लगातार गतिशील रहती है। आइए समझें इस आंकड़ों के जरिये कि रुपया वास्तव में देश कैसे चलता है।

1 रुपये के कैलकुलेशन में समझ जाएंगे सबकुछ

रुपया कहां से आता है? 

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में 1 रुपये के आधार पर सरकार के इनकम और खर्च को समझाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को 1 रुपये का इनकम कई माध्यमों से होता है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, एक रुपये के इनकम में 22 प्रतिशत इनकम टैक्स से, 24 प्रतिशत उधार और अन्य देनदारियों से, 9 प्रतिशत गैर-कर प्राप्तियो से, 1 प्रतिशत गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियों से, 4 प्रतिशत कस्टम से, 17 प्रतिशत कॉर्पोरेशन टैक्स से, 18 प्रतिशत जीएसटी और दूसरे टैक्स से और 5 प्रतिशत केंद्रीय उत्पाद शुल्क की भागीदारी होती है। यानी आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार को 1 रुपये में सबसे ज्यादा इनकम सरकारी उधारी और अन्य वित्तीय देनदारियों से होती है।

सरकार के इनकम का जरिया।

Image Source : ऑफिशियल वेबसाइट

सरकार के इनकम का जरिया।

रुपया कहां चला जाता है?

 आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, सरकार को इनकम के तौर आए 1 रुपये में, 20 प्रतिशत हिस्सा ब्याज चुकाने में, 16 प्रतिशत केंद्रीय क्षेत्र योजना (रक्षा पर पूंजीगत व्यय और सब्सिडी को छोड़कर) में, 6 प्रतिशत बड़ी सब्सिडी देने में, 8 प्रतिशत डिफेंस के लिए, 22 प्रतिशत राज्यों के टैक्स और शुल्क की हिस्सेदारी देने में, 8 प्रतिशत वित्त आयोग और अन्य हस्तांतरण में, 8 प्रतिशत केंद्र सरकार की योजनाओं में, 4 प्रतिशत पेंशन देने में और अन्य मदों में 8 प्रतिशत हिस्सा खर्च करना होता है। आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार का सबसे ज्यादा खर्च राज्यों के टैक्स और शुल्क की हिस्सेदारी देने में होता है। 

सरकार का खर्च किन मदों में कितना हो जाता है, के आंकड़े।

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सरकार का खर्च किन मदों में कितना हो जाता है, के आंकड़े।

प्रमुख मदों का खर्च रुपये में जानें 

रक्षा –                                    ₹4,91,732 करोड़


ग्रामीण विकास –                     ₹2,66,817 करोड़

गृह मामले –                           ₹2,33,211 करोड़

कृषि और संबद्ध गतिविधियां –   ₹1,71,437 करोड़

शिक्षा –                                 ₹1,28,650 करोड़ 

स्वास्थ्य –                               ₹98,311 करोड़

शहरी विकास –                      ₹96,777 करोड़

आईटी और टेलीकॉम –           ₹95,298 करोड़

इनर्जी (ऊर्जा) –                     ₹81,174 करोड़

कॉमर्स और इंडस्ट्री –              ₹65,553 करोड़

सामाजिक कल्याण –              ₹60,052 करोड़

वैज्ञानिक विभाग –                  ₹55,679 करोड़

इस तरह, सरकार इनकम और खर्च को बैलेंस कर देश चलाती है। इसमें महंगाई और वैश्विक आर्थिक हालात के आधार पर अंतर भी हो सकता है। इसे सरकार अपने तंत्र के जरिये मैनेज करती है। 

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