चंद्रपुर: महाराष्ट्र के चंद्रपुर नगर निगम में मेयर के चुनाव में कांग्रेस को बड़ा धक्का लगा है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने आखिरी समय में बीजेपी का साथ देकर कांग्रेस की रणनीति को ध्वस्त कर दिया। बीजेपी की संगीता खांडेकर मात्र एक वोट के अंतर से मेयर बन गईं। बता दें कि चंद्रपुर नगर निगम में कुल 66 वार्ड हैं। चुनाव नतीजों के मुताबिक, कांग्रेस के पास सबसे ज्यादा 27 नगरसेवक हैं, बीजेपी के पास 23 और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के पास 6 नगरसेवक हैं।
कांग्रेस की आंतरिक कलह ने बिगाड़ा काम
चंद्रपुर में किसी भी पार्टी का मेयर बनने के लिए 34 वोटों की जरूरत थी। कांग्रेस को पूरा भरोसा था कि उद्धव ठाकरे की पार्टी उसके साथ आएगी और उसका मेयर बनेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कांग्रेस में ही आंतरिक कलह ने भी काम बिगाड़ा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विजय वडेट्टीवार और चंद्रपुर की सांसद प्रतिभा धानोरकर अपने-अपने समर्थकों को मेयर बनाने के लिए आमने-सामने आ गए। मामला दिल्ली तक पहुंच गया। इसी बीच भाजपा ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना से बातचीत कर ली और समर्थन हासिल कर लिया।
VBA के 2 नगरसेवक अनुपस्थित रहे
आज हुए चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार संगीता खांडेकर को 32 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 31 वोट मिले। एक वोट के अंतर से बीजेपी मेयर पद का चुनाव जीत गई जबकि प्रशांत दानव डिप्टी मेयर चुने गए उद्धव ठाकरे की शिवसेना के 6 नगरसेवकों ने भाजपा को समर्थन दे दिया। वोटिंग के दौरान दो और अहम बातें हुईं जिनसे भाजपा को फायदा पहुंचा। वंचित बहुजन अघाड़ी यानी कि VBA के 2 नगरसेवक अनुपस्थित रहे, जबकि AIMIM के एक नगरसेवक ने वोट नहीं डाला। इन गैर-मौजूदगी और वोट न डालने का सीधा लाभ बीजेपी को मिला।
कांग्रेस ने उद्धव पर नाराजगी जताई
नतीजा आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने उद्धव ठाकरे की खुलकर आलोचना शुरू कर दी। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा, ‘जो कुछ भी हुआ है, वह गठबंधन के लिए ठीक नहीं है।’ वहीं, उद्धव ठाकरे की पार्टी के नेता इस फैसले की सफाई दे रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) के नेता सुनील प्रभु ने कहा, ‘बीजेपी को समर्थन देने का फैसला लोकल लेवल पर लिया गया। चंद्रपुर के नेताओं ने टॉप लीडरशिप से इस बारे में बात नहीं की। फिर भी पार्टी में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।’
अबू आजमी ने कसा जबरदस्त तंज
इस मौके पर समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने भी मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा, “ये सब दिखने में अलग-अलग हैं, लेकिन हकीकत में अलग नहीं हैं। उद्धव ठाकरे हों या असदुद्दीन ओवैसी, सब भाजपा से मिले हुए हैं। पूरा महाराष्ट्र इन दोनों की मिलीभगत देख रहा है।”यह घटना महाराष्ट्र में कांग्रेस-शिवसेना (यूबीटी) गठबंधन के बीच बढ़ते तनाव को साफ दिखाती है। चंद्रपुर जैसे शहर में जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, वहां उद्धव ठाकरे की पार्टी के फैसले ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं।
