AI ने पैदा किया एक और बड़ा खतरा, पूरी दुनिया रह जाएगी प्यासी? डेटा सेंटर हर साल पी रहा अरबों गैलन पानी


एआई डेटा सेंटर- India TV Hindi
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एआई डेटा सेंटर

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हो रहे AI Impact Summit में दुनियाभर के टेक लीडर्स शामिल हुए हैं। यहां एआई के प्रभाव और इसके यूजकेस को लेकर सबने बात की है। एआई एक तरफ जहां लोगों के काम को आसान बना रहा है, वहीं दुनिया के लिए एआई एक और बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। गूगल के 2024 इन्वायरोमेंटल रिपोर्ट ने एआई के इस खौफनाक सच को दुनिया के सामने रख दिया है। आने वाले समय में एआई पूरी दुनिया में साफ पानी की बड़ी किल्लत पैदा कर सकता है।

AI की प्यास बुझाने में इंसान रह जाएंगे प्यासे!

गूगल की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी का एआई डेटा सेंटर हर साल करीब 6.1 बिलियन गैलन यानी 6.1 अरब गैलन साफ पानी यूज कर रहा है। गूगल की तरह ही कई और कंपनियों के पास एआई डेटा सेंटर है, जो आने वाले समय में पानी की बड़ी समस्या पैदा कर सकता है। एआई की प्यास बुझाते-बुझाते कहीं दुनिया के लोग ही प्यासे न रह जाए।

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एआई डेटा सेंटर

पिछले साल ChatGPT ने जब Ghibli फीचर को अपने टूल में जोड़ा था, तो लोगों ने इसे इतना यूज किया कि सैम ऑल्टमैन को लोगों से इसे यूज नहीं करने का आग्रह करना पड़ा था। यूजर के एक Ghibli कमांड की वजह से ChatGPT का एआई डेटा सर्वर गर्म हो रहा था, जिसे ठंडा करने के लिए कई लीटर ठंडे पानी की जरूरत हो रही थी। Ghibli ट्रेंड के वायरल होने के बाद चैटजीपीटी का सर्वर भी लंबे समय के लिए डाउन हो गया था।

6.1 अरब गैलन पानी हर साल हो रहा यूज

गूगल ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि कंपनी के डेटा सेंटर ने 2023 में 6.1 बिलियन गैलन साफ पानी कंज्यूम किया है, जो 2022 के मुकाबले 17% ज्यादा है। पानी के साथ-साथ डेटा सेंट बिजली की भी इतनी ही खपत कर रहा है। 6.1 अरब गैलन पानी का मतलब है कि इतने पानी से कई एकड़ खेतों को पूरे साल सींचा जा सकता है। इतने पानी से कई शहरों की प्यास बुझ सकती है। इस समय एआई अपने ट्रांजिशन फेज में है, जिसकी वजह से एआई सर्च तेजी से बढ़ा है। ऐसे में आने वाले कुछ साल में एआई डेटा सेंटर और ज्यादा पानी की खपत करेंगे, जो भविष्य में साफ पानी की नई किल्लत पैदा कर सकता है।

AI डेटा सेंटर में क्यों इस्तेमाल होता है साफ पानी?

आपके मन में भी यह सवाल उठ रहा होगा कि एआई डेटा सेंटर में साफ पानी का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है? इसमें रिसाइकिल किए गए पानी या STP वाले पानी को यूज क्यों नहीं किया जाता है? इसे समझने के लिए सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि एआई डेटा सेंटर में कूलिंग कैसे काम करता है? आप घरों में इस्तेमाल होने वाले कम्प्यूटर या फिर लैपटॉप में भी देखते होंगे कि जब भी आप इस पर कोई काम करते हैं तो ये काफी मात्रा में गर्मी पैदा करता है। जब भी प्रोसेसर पर लोड पड़ता है, यह जबरदस्त थर्मल एनर्जी पैदा करता है।

एआई डेटा सेंटर में बड़े-बड़े प्रोसेसर और GPU लगे होते हैं, जो घर में इस्तेमाल होने वाले PC या लैपटॉप के मुकाबले लाखों गुना ज्यादा हीट जेनरेट करता है। ऐसे सिस्टम को ठंडा करने के लिए बड़े पैमाने पर पानी का इस्तेमाल किया जाता है। सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात ये है कि एआई डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले पानी का 80% भाप बनकर हवा में उड़ जाता है, जिसकी वजह से इसे रिसाइकिल भी नहीं किया जा सकता है। आप पानी को तो रिसाइकिल कर सकते हैं, लेकिन भाप को कैसे रिसाइकिल करेंगे?

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एआई डेटा सेंटर

डेटा सेंटर में साफ पानी के इस्तेमाल की वजह ये है कि अनट्रीटेड या फिर नेचुरल वाटर में कैल्सियम और मैग्नेशियम जैसे मिनरल्स होते हैं, जो डेटा सेंटर में लगे चिप के ऊपर परत बना सकते हैं। इसकी वजह से ये और ज्यादा गर्म हो जाएंगे। यही वजह है कि डेटा सेंटर में साफ RO वाटर का ही इस्तेमाल किया जाता है। STP और रिसाइकिल किए गए पानी में भी भरपूर मात्रा में मिनरल होते हैं, जिसकी वजह से डेटा सेंटर में केवल RO वाटर यानी साफ पानी ही यूज किया जा सकता है। यही सबसे बड़ा खतरा पैदा कर रहा है।

2028 तक 11 गुना तक बढ़ेगी पानी की खपत

हाल ही में क्लाइमेट साइंटिस्ट मॉर्गन स्टानली ने एक रिसर्च किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि 2028 तक एआई डेटा सेंटर में पानी की खपत 11 गुना तक बढ़ सकती है। ऐसे में ये पूरी दुनिया के लिए अलार्मिंग है। एआई डेटा सेंटर में डेली इस्तेमाल होने वाला पानी कम से कम 50 हजार लोगों की प्यास बुझा सकता है। आने वाले समय में एआई हमारी नौकरियां ही नहीं खाएगा, बल्कि ये हमें प्यासा भी बनाकर छोड़ देगा। ऐसे में दुनिया के सबसे बहुमूल्य नेचुरल रिसोर्स यानी पानी को बचाने का बड़ा दबाब टेक कंपनियों के साथ-साथ सरकारों पर भी है।

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