
बॉम्बे हाईकोर्ट ने SNDT महिला यूनिवर्सिटी को एक पुरुष को डिग्री देने का आदेश दिया है।
मुंबई: SNDT महिला विश्वविद्यालय अपने 116 साल के लंबे इतिहास में पहली बार एक पुरुष को ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री देगा। बता दें कि यह फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद लिया गया है। दरअसल, गुजरात के एक छात्र ने लिंग परिवर्तन के लिए सर्जरी करवाई थी। इसके बाद उसने अपने नए नाम और नए लिंग के साथ डिग्री और प्रमाणपत्र जारी करने की मांग की थी, लेकिन विश्वविद्यालय ने इस मांग को ठुकरा दिया था। विश्वविद्यालय द्वारा अपनी मांग को खरिज किए जाने के बाद छात्र इस मामले को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा था। अब हाईकोर्ट के निर्देश पर विश्वविद्यालय छात्र को संशोधित नाम और लिंग के साथ डिग्री प्रमाणपत्र देगा।
‘नियम व शर्तों को शिक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बनाया जा सकता’
बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस ट्रांसजेंडर छात्र को बड़ी राहत देते हुए SNDT महिला विश्वविद्यालय को सख्त निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता की स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री नई पहचान के अनुसार जारी करे। विश्वविद्यालय के 116 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार होगा जब किसी पुरुष के नाम से डिग्री प्रदान की जाएगी। जस्टिस रियाज आई. चगला और जस्टिस अद्वैत एम. सेठना की खंडपीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कहा कि विश्वविद्यालय का मूल उद्देश्य शिक्षा प्रदान करना है। कोर्ट ने कहा कि नियम और शर्तें केवल प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए हैं, इन्हें शिक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बनाया जा सकता।
‘यूनिवर्सिटी को संशोधित डिग्री और मार्कशीट जारी करनी चाहिए’
अदालत ने यह भी जोड़ा कि किसी व्यक्ति की वैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त नई पहचान को तकनीकी आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता ने लिंग परिवर्तन सर्जरी के बाद अपने सभी आधिकारिक दस्तावेजों को अपडेट कराया था, जिनमें आधार कार्ड और पासपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए माना कि जब सभी सरकारी अभिलेखों में नई पहचान दर्ज है, तो विश्वविद्यालय को भी संशोधित डिग्री और मार्कशीट जारी करनी चाहिए। कोर्ट की गाइडलाइन के आधार पर याचिकाकर्ता के वकील ने उसकी पहचान को पब्लिक न करने की अपील की है, इसलिए छात्र की निजी जानकारी को गोपनीय रखा गया है।
