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এশিয়ার প্রথম মহিলা হিসেবে মলোকাই চ্যানেল জয় পূর্ব বর্ধমানের সায়নীর

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এশিয়ার প্রথম মহিলা হিসেবে মলোকাই চ্যানেল জয় পূর্ব বর্ধমানের সায়নীর

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মালদহে জোর ঠান্ডা খাওয়া চলছে, কম পয়সার নতুন আইটেম ফালুদা মাতাচ্ছে মন

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#মালদহ: চাউমিন, এগরোল বা মোমো নয়,গরম থেকে রেহাই পেতে ঠান্ডা খাবারের মজেছে মালদহ। বিকেলের পর থেকেই রাস্তার ধারের ফালুদা দোকানে ভিড় জমাচ্ছেন যুবক- যুবতী থেকে খুদেরা। এই প্রথম মালদহ শহরে ফালুদা নিয়ে হাজির হয়েছেন ভিনরাজ্যের বিক্রেতারা। জেলায় গরমের তীব্রতাও বেড়েছে। গরম থেকে কিছুটা স্বস্থি পেতে ঠান্ডা পানীয় বা ঠান্ডা খাবারের খোঁজে আমজনতা।

মিল্কশেক, চিনি দিয়ে তৈরি হয় বিশেষ এই ঠান্ডা খাবার। সঙ্গে সিমাই, কিসমিস, বাদাম, নারকেল মেশানো হয়। খেতে মিষ্টি সুস্বাদু এই ঠান্ডা খাবার অনেকটা লস্যি বা মিল্কশেকের মত। তবে পানীয় নয়, এটি একটি ঠান্ডা খাবার। বাইরে বেরিয়ে নতুন এই খাবার খেতেই ভিড় করছেন সকলে। মালদহ শহরের সুকান্ত মোড়ে জাতীয় সড়কের ধারে গাড়িতে করে বিক্রি করছেন ফালুদা। ছোট চার চাকার গাড়িকে দোকানের আকার দেওয়া হয়েছে। গাড়ির মধ্যে তৈরি হচ্ছে ভিনরাজ্যের এই ঠান্ডা খাবার।  মালদহের বাজারে এক গ্লাস ফালুদা বিক্রি হচ্ছে ৬০ টাকায়। সাধ্যের মধ্যে দাম থাকায় ভিড় করছেন।

আরও পড়ুন – Paschim Bardhaman: গাছ থেকে লাফালাফি করে পা ভাঙল হনুমানের, তারপর…

অনেকেই খাবারের নাম শুনে ছুটে আসছেন। শুধু ফালুদা নয়, সঙ্গে মিল্কশেক, আইসক্রিম সহ বেশ কিছু ঠান্ডা খাবার ও পানীয় রয়েছে এই দোকানে। তবে এখানে অধিকাংশ মানুষ ফালুদা খেতেই আসছেন।রাজস্থানের বিক্রেতারা এই প্রথম মালদহে ফালুদা নিয়ে এসেছেন। বিক্রেতারা পশ্চিমবঙ্গের বিভিন্ন জেলায় ঘুরে ঘুরে বিক্রি করেন। এই বছর গরমের মরশুমে মালদায় আসেন। গত তিন সপ্তাহ আগে এখানে এসেছে। প্রথমদিকে একটু বিক্রি কম হয়েছে। এখন শহরের বহু মানুষ জেনে গিয়েছেন মালদহে বিক্রি হচ্ছে ঠান্ডা খাবার ফালুদা। বিক্রেতারা সুকান্ত মোড়ে নির্দিষ্ট জায়গায় বসছেন প্রতিদিন। বিকেলের পর থেকে রাত ১০ টা পর্যন্ত চলছে বিক্রি।

বিক্রেতারা জানান, তারা এবার প্রথম মালদহে এসেছে। ঘুরে ঘুরে প্রতিবছর বিভিন্ন জায়গাই বিক্রি করে।এখন পর্যন্ত মালদহে বেচা কেনা ভাল হচ্ছে। ফালুদার প্রতি মানুষের আকর্ষণ রয়েছে। তাই তারা এখানে স্থায়ীভাবে একটি জায়গাই বিক্রি করছে। গোটা গ্রীষ্মের মরশুম থেকে কালিপুজো পর্যন্ত তারা এখানে থাকবেন। কালিপুজোর পর ফিরে যাবেন বাড়ি। আবার গরমের মরশুমে মালদহে আসবেন।

 Harashit Singha

Published by:Debalina Datta

First published:

Tags: Maldah, Summer

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Chardham Yatra: चारधाम श्रद्धालुओं की नहीं होगी कोविड जांच; वैक्सीन सर्टिफिकेट भी जरूरी नहीं

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Corona Test and Vaccination certificate not required for Chardham Yatra: कोविड के बढ़ रहे मामलों के बीच तीन मई से शुरू हो रही चारधाम यात्रा से पहले उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार को साफ किया कि बाहर से राज्य में आने वाले यात्रियों और श्रद्धालुओं की कोविड जांच रिपोर्ट, टीकाकरण प्रमाणपत्र या इससे संबंधित अन्य किसी प्रकार की जांच की अनिवार्यता नहीं है.

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ED ने कोलकाता पुलिस पर लगाया जालसाजी का आरोप, जानें अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा

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ED accuses Kolkata Police: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यहां पुलिस में शिकायत दर्ज की जिसमें कोलकाता पुलिस पर अदालत के एक आदेश में ‘फर्जीवाड़ा’ करने का आरोप लगाया है.यह जानकारी अधिकारियों ने शुक्रवार को दी. अधिकारियों ने बताया कि ईडी की शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने प्राथमिकी दर्ज की है. उन्होंने कहा कि कोलकाता पुलिस के अधिकारियों को जल्द ही समन जारी किया जा सकता है. 

ED की इस शिकायत पर हुई कार्रवाई

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘ईडी की इस शिकायत के बाद कोलकाता पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई है कि कोलकाता पुलिस द्वारा उन्हें भेजे गए अदालत के एक आदेश में जालसाजी की गयी है. उनके द्वारा भेजे गए अदालत के आदेश में कहा गया है कि ईडी के संयुक्त निदेशक कपिल राज को अपनी आवाज का नमूना प्रदान करना चाहिए लेकिन इसमें उन शब्दों को छोड़ दिया जिनमें उनकी सहमति लेने का उल्लेख किया गया था. 

अलीपुर की अदालत ने आदेश जारी किया था

उन्होंने कहा कि अलीपुर की एक अदालत ने आदेश जारी किया था और संयुक्त निदेशक को अपनी सहमति से आवाज का नमूना देने के लिए कोलकाता पुलिस के समक्ष पेश होने को कहा गया था. ईडी के सूत्रों ने कहा कि एजेंसी को कोलकाता पुलिस से अदालत का आदेश ‘सहमति’ शब्द का उल्लेख किए बिना प्राप्त हुआ. कोलकाता पुलिस द्वारा जांच किया जा रहा मामला एक शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था जब एक समाचार चैनल द्वारा एक कथित ऑडियो वार्तालाप प्रसारित किया गया था जिसमें दावा किया गया था कि एक व्यापारी और ईडी के एक अधिकारी कुछ लोगों द्वारा कथित रिश्वत के भुगतान के बारे में बात कर रहे हैं.

अभिषेक बनर्जी भी शामिल..

कपिल राज पश्चिम बंगाल में कथित कोयला चोरी और धनशोधन मामले की जांच कर रहे पर्यवेक्षी अधिकारी हैं, जिसमें तृणमूल कांग्रेस सांसद और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी भी शामिल हैं. ईडी इस मामले में बनर्जी से दो बार पूछताछ कर चुका है जबकि उनकी पत्नी रूजिरा समन जारी होने के बावजूद अब तक एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुई हैं. 

‘आदेश से हटाया गया शब्द’

ईडी के अधिकारियों ने कहा कि कथित ‘आदेश से सहमति शब्द का जानबूझकर हटाना या संपादन करना कोयला घोटाले की जांच सहित पश्चिम बंगाल में धनशोधन के मामलों की जांच कर रही एजेंसी और उसके अधिकारियों को धमकाने का एक प्रयास था.’ अभिषेक बनर्जी ने ईडी की जांच को केंद्र द्वारा उनके और उनकी पार्टी के खिलाफ ‘प्रतिशोध की राजनीति’ कहा है, जिसकी प्रमुख पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं.

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DNA Analysis: पर्याप्त कोयले के बावजूद देश में क्यों बढ़ रहा बिजली संकट? ये है बड़ी वजह

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DNA Analysis on Power Crisis: पूरा उत्तर भारत इन दिनों लू यानी हीट वेव की गिरफ्त में है. अप्रैल में ही तापमान 45 डिग्री पार कर गया है. मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए बेहद गर्म दिनों की भविष्यवाणी की है. लोग हैरान हैं क्योंकि अप्रैल माह के लिए ये तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री ज्यादा है. 

शुक्रवार को सबसे गर्म रहा बांदा जिला

अगर शुक्रवार के आंकड़ें देखें तो उत्तर प्रदेश का बांदा जिला सबसे गर्म रहा. यहां तापमान 47.4 डिग्री तक पहुंच गया. वहीं राजस्थान के गंगानगर में तापमान 46.4 डिग्री रिकॉर्ड किया गया. महाराष्ट्र के चंद्रपुर में भी सूरज जैसे आग उगल रहा है, वहां भी आज का तापमान  46.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. दिल्ली में तापमान 46.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. बिहार के गया में तापमान 44.1 डिग्री और झारखंड के डाल्टनगंज में 45.7 डिग्री तक पहुंच गया. मध्य प्रदेश के खजुराहो में 45.4 डिग्री तापमान रहा. हरियाणा के गुरुग्राम में 45.2 डिग्री तापमान रहा. अहमदाबाद में 44.2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया.

इतनी गर्मी के बीच अगर बिजली भी चली जाए तो दिक्कत कई गुना बढ़ जाती है. देश के कई हिस्से भीषण गर्मी के बीच घंटों की बिजली कटौती झेल रहे हैं. जैसे राजस्थान में गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की मांग 31 प्रतिशत बढ़ गई है. इससे राज्य के शहरी इलाकों में 3 घंटे तक बिजली कटौती करनी पड़ रही है.

राज्यों में बढ़ी बिजली की किल्लत

ये वही राजस्थान हैं. जहां कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार बिजली पर छूट दे रही है. वहां पर जो लोग महीने में 100 यूनिट तक बिजली खर्च करते हैं, उनका 50 यूनिट फ्री हो जाता है. वहीं पंजाब में बिजली की मांग 8 हजार मेगावॉट पहुंच चुकी है, जबकि सप्लाई 5 हजार मेगावॉट है. मांग और आपूर्ति के इसी अंतर की वजह से पंजाब में भी 2 घंटे की बिजली कटौती शुरू हो गई है.

ये वही पंजाब है जहां आम आदमी पार्टी की सरकार के आने के बाद से हर घर को हर महीने 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जा रही है. बिहार का भी बुरा हाल है, वहां शहरों में 2 घंटे तो गांवों में 2-3 घंटे तक बिजली गुल रहती है. वहीं उत्तर प्रदेश के शहरों में भी 2-3 घंटे की बिजली कट रही है. हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों में 4-6 घंटे तक बिजली कट रही है. हरियाणा में तो हाल और भी बुरा है. वहां हर रोज 6-8 घंटे तक बिजली काटी जा रही है. ये वही हरियाणा है जहां बीजेपी की मनोहर लाल खट्टर सरकार किसानों को छूट दे रही है. वहां किसान हर यूनिट बिजली के लिए सिर्फ 10 पैसे देते हैं.

देश में क्यों बढ़ रहा बिजली का संकट

अगर 2019 के आंकड़ों को देखा जाए तो भारत में राज्य सरकारों ने बिजली पर जनता को 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपए की छूट दी, जिसका तीन चौथाई हिस्सा यानि 82 हजार 793 करोड़ रुपए किसानों को गया. ये बात आप इस आंकड़े से समझ सकते हैं कि भारत का शिक्षा बजट कुल 1 लाख 4 हजार करोड़ रुपये का है. यानि देश के शिक्षा बजट से भी ज्यादा बजट फ्री बिजली का है, जो तमाम राज्य सरकारें वोटबैंक के लिए दे रही हैं.

अब सवाल ये उठ रहा है कि आखिर देश में अचानक बिजली की कमी कैसे हो गई है, गर्मियों में अमूमन बिजली की मांग बढ़ जाती है, लेकिन यहां तो अप्रैल महीने में ही बिजली कटौती की नौबत आ गई है. ये मुद्दा बिजली की कमी से ज्यादा कोयला बिल के भुगतान का है. बिजली कटौती का ये संकट ज्यादातर राज्यों का खुद का खड़ा किया गया संकट है. आंकड़ों को देखें तो वक्त पर बिल न भरने की राज्यों की बुरी आदत का पता चलता है, इस आदत का नुकसान आम आदमी उठा रहा है.

राज्यों ने कोयला कंपनियों को नहीं किया भुगतान

इसी साल 18 अप्रैल तक के केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र ने कोयला कंपनियों को 2 हजार 608 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया है. दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल है जो अब तक 1 हजार 509 करोड़ रुपए का बिल दबा कर बैठा हुआ है. तीसरे नंबर पर है, झारखंड जिसके सिर पर कोयला कंपनियों का 1 हजार 18 करोड़ रुपया बकाया है. इसके बाद आता है तमिलनाडु, जिसे कोयला कंपनियों का 823.9 करोड़ रुपया भरना है. 

मध्य प्रदेश सरकार ने भी कोयला कंपनियों के 531.4 करोड़ रुपए का बिल नहीं चुकाया है. वहीं राजस्थान के सिर पर 429.5 करोड़ का बिल है तो आंध्र प्रदेश को 271 करोड़ और उत्तर प्रदेश को 213.8 करोड़ रुपए चुकाने हैं. छत्तीसगढ़ ने भी कोयला कंपनियों के 202.8 करोड़ और कर्नाटक ने 134.6 करोड़ रुपए दबा रखे हैं.

इन 4 पॉइंट्स से समझें समस्या की जड़

कोयला कंपनियां राज्यों के बिजली घरों को कोयला सप्लाई करती हैं और सरकारों को उनका पैसा वक्त रहते चुकाना चाहिए, लेकिन ये आंकड़े बता रहे हैं कि ऐसा हो नहीं रहा है. दिक्कत कैसे बढ़ती इसे आपको चार Points में समझाते हैं.

-गर्मियों में बिजली की डिमांड बढ़ती है तो राज्यों को उसके लिए अतिरिक्त बिजली खरीदने की जरूरत पड़ती है.
-कोयला कंपनियों का बिल भरना उनके एजेंडे में नहीं होता है, इसीलिए वो जितना कोयला मिल रहा है उसी में संतोष कर लेते हैं, यानि उनके बिजली घर बढ़ी डिमांड के हिसाब से अतिरिक्त बिजली बना नहीं पाते.
– राज्यों के पास ग्रिड से अतिरिक्त बिजली खरीदने का विकल्प होता है, वो 12 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद कर बढ़ी हुई मांग की पूर्ति कर सकते हैं
-लेकिन राज्य सरकारें ऐसा नहीं करते और इसके बाद बिजली कटौती का मैप तैयार करती हैं. ये तय किया जाता है कि किन इलाकों में कितने घंटे बिजली काट कर मौजूदा स्टॉक में काम चला लिया जाए.

दिल्ली में बढ़ गई है बिजली कटौती

कहा ये भी जा रहा है कि देश में कोयले की सप्लाई में दिक्कतों की वजह से भी बिजली घर पर्याप्त बिजली नहीं बना पा रहे हैं और संकट पैदा हो रहा है. जल्द ही कोयले की सप्लाई राजनीतिक मुद्दा भी बन जाता है और विपक्ष सरकार पर ही बिजली गिराने लगता है. इस बीच देश के कई इलाकों से विरोध प्रदर्शन की खबरें भी आ रही हैं. लोग नाराज हैं कि अपना बिजली बिल वक्त पर भरने के बाद भी आखिर उन्हें बिजली क्यों नहीं मिल पा रही है. वो क्या जानें कि उनकी राज्य सरकारें कोयला कंपनियों के बिल नहीं भर रही हैं, जिसकी वजह से उनके घर अंधेरे में डूबे हैं.

दिल्ली में भी बिजली का संकट बना हुआ है. दिल्ली सरकार के मुताबिक राजधानी में कोयले का बड़ा संकट है और अगर समय रहते सहायता नहीं की गई तो दिल्ली में मेट्रो और अस्पतालों को 24 घंटे बिजली देनी मुश्किल हो जाएगी.

कोयले की कमी की बात से केंद्र सरकार भी इनकार नहीं कर रही है. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी के मुताबिक कुछ बिजली घरों में कोयले की किल्लत है लेकिन देश के पास अभी भी अगले 10 दिनों के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. केंद्रीय मंत्री के मुताबिक कोयले की ढुलाई 16 फीसदी बढ़ाई गई है लेकिन उसकी डिमांड भी 20 फीसदी बढ़ गई है.

कोयले की कमी है ये बात केंद्र सरकार भी मान रही है लेकिन क्या वाकई में कोयले की कमी की वजह से बिजली की कमी झेलनी पड़ रही है. केंद्र सरकार का साफ कहना है कि कुछ बिजली घरों में दिक्कतें हैं क्योंकि वहां तक कोयला पहुंचने में वक्त लगता है.

ये भी पढ़ें- DNA Analysis: आपके किचन तक पहुंचा यूक्रेन-रूस युद्ध का असर, दुनिया में पैदा हुआ खाद्य तेल का संकट

क्या 4 फीसदी का अंतर बन रहा वजह

केंद्र का दावा है कि इस वक्त देश के पास 2 करोड़ 10 लाख टन कोयले का रिजर्व स्टॉक है. ये अगले दस दिनों तक के लिए पर्याप्त है. इस रिजर्व स्टॉक से कोयला तभी लिया जाता है, जब कोयले की मांग उसकी आपूर्ति से बढ़ जाती है. केंद्र सरकार का कहना है कि कोयले की आपूर्ति जहां 2019-20 में 569 मिलियन टन थी, वहीं इसे 2021-22 में बढ़ाकर 662 मिलिटन टन किया गया है. 

गर्मी के मौसम में कोयले की मांग और सप्लाई में अंतर आता है. इस वजह से उन बिजली घरों में दिक्कतें आती हैं, जहां तक कोयला पहुंचने में वक्त लगता है.  कोयले की ढुलाई ट्रेनों से ही की जाती है. बताया गया है कि कोयले की आपूर्ति 16 फीसदी बढ़ाई गई है लेकिन उसकी डिमांड 20 फीसदी बढ़ गई है. इस चार फीसदी के फर्क की वजह से ही कुछ राज्यों में कोयले की सप्लाई को लेकर दिक्कतें आ रही हैं लेकिन केंद्र का कहना है कि जल्द ही इसे दूर कर लिया जाएगा. 



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Bhalswa Landfill Fire: Residents File Police Complaint Against NDMC Officials

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A massive fire that broke out at the Bhalswa landfill site in north Delhi. (PTI Photo)

Firefighters struggled to douse the fire at the site for the fourth straight day on Friday

  • PTI New Delhi
  • Last Updated:April 30, 2022, 00:00 IST
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A police complaint was filed by those residing near the Bhalswa landfill site here against the North Delhi Municipal Corporation in connection with a fire raging at the dumping yard for the last four days. The residents filed the complaint at Bhalswa Dairy police station, demanding legal action against North Delhi Mayor Raja Iqbal Singh, Deputy Mayor Archana Dilip Singh, and North MCD standing committee vice-chairman Vijay Kumar Bhagat. In the complaint letter, the locals said the smoke emitting from the fire at the landfill site has been posing a risk to their lives.

“The fire that has been raging for the last four days has been posing a health risk for the residents in Bhalswa. Residents of Bhalswa are not able to breathe. The smoke is causing major health problems, especially for the elderly and the children,” the complaint copy mentioned. Firefighters struggled to douse the fire at the site for the fourth straight day on Friday.

Meanwhile, Delhi Commission for Women chief Swati Maliwal issued summons to the North MCD commissioner over the incident and sought details about steps taken by the civic body to clear up the site.

The Delhi Pollution Control Committee (DPCC) has also slapped a fine of Rs 50 lakh on the North Delhi Municipal Corporation (NDMC) for being negligent and not taking proper steps to prevent the fire at the Bhalswa landfill.

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Blistering Heatwave Conditions Sweep Haryana, Punjab; Gurugram Sizzles at 45.9 Deg C

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Commuters cover their face with clothes to shelter from the heat as they make their way along a road on a summer afternoon in Amritsar, Punjab. (AFP)

Gurugram, at 45.9 degrees Celsius, was the hottest place in Haryana

  • PTI Chandigarh
  • Last Updated:April 29, 2022, 23:58 IST
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Scorching heat wave conditions continued unabated in Haryana and Punjab on Friday as the maximum temperatures continued to stay several notches above normal. Gurugram, at 45.9 degrees Celsius, was the hottest place in Haryana. Hot weather conditions also prevailed in Hisar and Bhiwani, with both towns recording respective maximum temperatures of 45 degrees Celsius and 44.8 degrees Celsius,the meteorological department’s weather report said.

Among other places in Haryana, Narnaul recorded a high of 45 degrees Celsius, while Rohtak sizzled at 44.1 degrees Celsius. Ambala recorded a high of 42.4 degrees Celsius. Karnal recorded a maximum of 42.7 degrees Celsius. Meanwhile, in Punjab, intense heatwave prevailed in Bathinda, which recorded a high of 44 degrees Celsius. Patiala recorded the maximum of 43.4 degrees Celsius.

Ludhiana’s high settled at 43.2 degrees Celsius, while Amritsar saw the highest temperature of 42.3 degrees Celsius. Jalandhar registered a high of 42.7 degrees Celsius. Chandigarh, the common capital of the two states, recorded a high of 42.2 degrees Celsius.

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India-Bhutan Development Cooperation Unique, Prompted by Moral Principles and Emotional Bonds: Jaishankar

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The India-Bhutan relationship is based on a genuine concern for each other’s welfare and interests, External Affairs Minister S Jaishankar said here on Friday, asserting that New Delhi’s development cooperation paradigm with the Himalayan nation is unique, prompted by moral principles and emotional bonds. Jaishankar, who is here on an official visit at the invitation of his Bhutanese counterpart Lyonpo Tandi Dorji, is Bhutan’s first high-level visitor from abroad since the onset of the COVID-19 pandemic in the country in March 2020.

He met the country’s top leadership, including King Jigme Khesar Namgyel Wangchuck and Prime Minister Lyonchhen Lotay Tshering. Taking to Twitter, Jaishankar said that he was privileged to meet the Bhutanese King.

Privileged to be received by His Majesty the King of Bhutan. His vision of transforming Bhutan shapes the direction of our unique partnership, he said in a tweet. In his remarks at the handing over ceremony for the 12th consignment of medical supplies and e-inaugurations here, the external affairs minister congratulated the Bhutanese government and its people on their success in the fight against COVID-19 in the past two years, the External Affairs Ministry (EAM) said in a statement.

This has been a difficult journey for all of us. I think it is a testimony to our friendship that we have displayed the kind of solidarity that we have done in these times, Jaishankar said. It is a matter of great satisfaction as well that the bilateral cooperation has continued to flourish even during the difficult period, he said.

Our relationship is based on a genuine concern for each other’s welfare and interests. India’s development cooperation paradigm is unique, prompted as much by economic impulse as by moral principles and emotional bonds, the external affairs minister said.

Given the long-standing ties and special bilateral partnership, Bhutan was the natural choice to be the first country to receive the Covishield vaccines under our Vaccine Maitri Initiative, he said. Jaishankar said that Prime Minister Narendra Modi has often emphasised that Bhutan being a close friend and a privileged neighbour, the friendly people of Bhutan enjoy a special place in the hearts and minds of Indians. This relationship, rooted in history and yet forward looking, always delivers.

I am happy that our traditional relations have grown in new sectors since the Prime Minister’s visit in 2019, in keeping with the wishes and aspirations of the Bhutanese people, he said. In this vein, financial connectivity has touched new heights through the launch of the RuPay card and the BHIM app; our two countries are collaborating closely on STEM through regular placement of Bhutanese youth in our IITs.

We have successfully linked up the Start-Up systems of our two countries via structured workshops; through the National Knowledge Network & the Druk-REN connection and the e-Library project, we have opened up new vistas of education and knowledge sharing between our two countries. I am also pleased to share that the INDIA BHUTAN-SAT is due to launch into space shortly, Jaishankar said. He joined his Bhutanese counterpart Lyonpo Tandi Dorji in the inauguration of three projects.

We will continue to stand resolutely by your side through a post COVID sustainable recovery which is your current focus, the external affairs minister said. All visits to Thimphu and to Bhutan are always memorable, but I think this one has a very special sense.

I will return with a great sense of satisfaction that our partnership is as solid as it is special, that it always delivers results, especially in face of daunting challenges as we have experienced in the last two years and above all it responds to the wishes, aspirations and priorities of the people of Bhutan, Jaishankar added.

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স্ট্রবেরি চাষে ব্যাপক লাভ, উত্তর ২৪ পরগণাতে পথ দেখাচ্ছেন ‘এই’ চাষি

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#উত্তর ২৪ পরগনা: জেলায় মূলত ধান, পাট, বিভিন্ন সবজি চাষ হয়। কিন্তু এই প্রথম মাটিতে স্ট্রবেরি উৎপাদন করে নজির সৃষ্টি করলেন দেগঙ্গার একজন চাষি৷ গাছ ভর্তি স্ট্রবেরি দেখে খুশি ওই চাষি। বিক্রিও করছেন অনেক বেশি দামে। এই স্ট্রবেরি যথেষ্ট লাভজনক চাষ বলে মনে করেন তিঁনি।

বাড়ির ছাদ, বাগানে অনেকেই  স্ট্রবেরি গাছ লাগিয়ে ফল ফলিয়েছেন। তবে রক্ষণাবেক্ষণ ঠিকমতো  কর‍তে না পারায় তাতে সাফল্য পেয়েছেন খুবই কম মানুষ। এখানকার মাটি এবং আবহাওয়া সব মিলিয়ে এই স্ট্রবেরির বাণিজ্যিক চাষে কেউ সাহস দেখায়নি। তবে সব কিছুরই ব্যতিক্রম থাকে। অবশেষে সেই সাহস দেখিয়ে সাফল্য পেলেন উত্তর চব্বিশ পরগনা জেলার দেগঙ্গা ব্লকের বেড়াচাঁপা-এক নম্বর পঞ্চায়েতের বেলপুর গ্রামের চাষি সাজ্জাদ।

আরও পড়ুন – Chandannagar News: চোখে সানগ্লাস, মাথায় হেলমেট, মহিলাদের সুরক্ষায় তৈরি উইনার্স টিম

বহুদিন ধরেই নার্সারি রয়েছে সাজ্জাদের । সেখানে আবহাওয়াযর সঙ্গে তাল মিলিয়ে নানান প্রজাতির ফল ও  ফুলের গাছ রয়েছে। তবে বেশির ভাগই টবে লাগানো গাছ। নানান ফুল রয়েছে নার্সারি জুড়ে। এতসবের পরেও এই প্রথম স্ট্রবেরি চাষে ইচ্ছা জাগে সাজ্জাদের। সেই মত স্ট্রবেরি চাষ করার পরিকল্পনা নিয়ে চাষ শুরু করেন। বর্তমানে গাছ ভরতি স্ট্রবেরি হয়েছে। বিক্রিও হচ্ছে যথেষ্ট বেশি দামে।

এই প্রথম পরীক্ষামূলকভাবে যে সাফল্য পেয়েছেন ওই চাষি, তাতে আগামী দিনে এই চাষ আরও বৃহৎ আকারে করতে চান তিঁনি। কৃষি দফতরের পরামর্শ নিয়েছেন সাজ্জাদ। স্ট্রবেরি চাষে সাফল্য পাওয়ায় স্ট্রবেরি চারা গাছের বিক্রিও বেড়ে গেছে অনেকটাই। এখন এই স্ট্রবেরি চাষের ফলে সাজ্জাদ আলি খাঁ এর দেগঙ্গা নার্সারি অনেকের কাছেই পরিচিত নাম। দেগঙ্গা এলাকায় মূলত ধান, পাট, বিভিন্ন সবজি চাষ হয়। কিন্তু স্ট্রবেরি চাষ এই প্রথম এবং প্রথমবারেই সাফল্য পেয়েছে দেগঙ্গার চাষি। তাতে আগ্রহ বাড়ছে স্থানীয় চাষিদের৷

Rudra Narayan Roy

Published by:Debalina Datta

First published:

Tags: Cultivation, Earn money, Strawberry Cultivation

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