‘रोजा’ से बना सुपरस्टार, पैरालिसिस ने किया तबाह, फिर ऐसी पलटी किस्मत बन गया 3300 करोड़ी कंपनी का मालिक


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मनीषा कोइराला और अरविंद स्वामी।

20 साल की उम्र में मणिरत्नम की फिल्मों से करियर की शुरुआत करने वाले इस एक्टर को बड़े-बड़े दिग्गजों के साथ काम करने का मौका मिला। प्रभुदेवा, रजनीकांत और ममूटी जैसे सिनेमा के दिग्गजों के साथ अपना इस एक्टर के करियर में भी चार चांद लग गए। एक के बाद एक फिल्मों की झड़ी लगने लगी। हिट पर हिट देकर ये एक्टर क्लासिक फिल्में बनाने वाले फिल्म मेकर्स की पसंद बन गया। इस एक्टर के नाम पूरे देश में पसंद की गई दो सुपरहिट फिल्में भी रहीं- ‘रोजा’ और ‘बॉम्बे’। ये एक्टर करियर की शुरुआत में ही सुपरस्टार का दर्जा हासिल कर चुका था, लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि ये एक्टर फिल्मी करियर छोड़ अलग राह पर चल पड़ा। 10 साल सफलता के मजे लेने के बाद एक्टर ने 30 साल की उम्र में फील्ड ही बदल दी। 

दीं कई सुपरहिट फिल्में

सफलता की सीढ़ियां चढ़ने वाले तमिल स्टार ने ऐसा ही किया। करियर के पीक पर पहुंचकर उन्होंने फिल्मों को अलविदा कह दिया और लंबे समय तक पर्दे से दूर रहे। ये एक्टर कोई और नहीं बल्कि अरविंद स्वामी हैं। साल 1991 में 20 साल की उम्र में अरविंद स्वामी ने मणिरत्नम की ‘थलपति’ से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की, जहां उन्होंने ‘महाभारत’ के अर्जुन से प्रेरित एक किरदार निभाया। उन्होंने मणिरत्नम की दो बड़ी राष्ट्रीय हिट फिल्मों में काम किया। साल 1992 में ‘रोजा’ और 1995 में ‘बॉम्बे’ ने अरविंद की किस्मत बदल दी। इन फिल्मों की सफलता ने उन्हें एक स्टार के रूप में स्थापित कर दिया। उनके स्टारडम और अभिनय की साख को तब और बढ़ावा मिला जब उन्होंने 1997 में काजोल के साथ राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म ‘मिनसारा कनवु’ में अभिनय किया। 

बॉलीवुड में की एंट्री

तमिल फिल्मों में छाने के बाद अरविंद ने बॉलीवुड का रुख किया। उन्होंने जूही चावला के साथ ‘सात रंग के सपने’ में बॉलीवुड में अपनी शुरुआत की। लगातार मिल रही सफलताओं के चलते ये माना जाने लगा था कि रजनीकांत और कमल हासन के बाद वो ही इस इंडस्ट्री के दिग्गज एक्टर हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अरविंद स्वामी ने 30 की उम्र में अभिनय छोड़ दिया। 90 के दशक के अंत तक उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खासा प्रदर्शन नहीं कर रही थीं। मुख्य अभिनेता के रूप में उनकी कुछ फिल्में बंद कर दी गईं, जिनमें ऐश्वर्या राय के साथ महेश भट्ट की फिल्म और अमिताभ बच्चन के साथ अनुपम खेर के निर्देशन वाली फिल्में शामिल थीं। मामला यहीं नहीं रुका, उनकी दो फिल्मों को पूरा करने में कई साल लगे। 

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मनीषा कोइराला और अरविंद स्वामी।

इस तरह छोड़ी फिल्में

अपने करियर की इस दिशा से हतोत्साहित होकर अरविंद स्वामी ने साल 2000 के बाद फिल्मों में अभिनय करना बंद कर दिया। उन्होंने अपने पिता के बिजनेस की ओर ध्यान देना शुरू किया। वी डी स्वामी एंड कंपनी में काम किया और बाद में इंटरप्रो ग्लोबल में भी काम किया। साल 2005 में उनका एक एक्सीडेंट हुआ जिसके कारण उनका पैर पैरालाइज्ड हो गया। इलाज में लगभग 4-5 साल लगे और उन्हें लंबे समय तक तकलीफ झेलनी पड़ी। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी 2005 में उन्होंने आज तक का अपना सबसे सफल बिजनेस स्थापित किया। अपनी चोट से ठीक पहले स्वामी ने टैलेंट मैक्सिमस की स्थापना की, जो भारत में पेरोल प्रोसेसिंग और अस्थायी स्टाफिंग में लगी एक कंपनी है। रॉकेटरीच जैसे कई मार्केट ट्रैकिंग पोर्टल के अनुसार 2022 में टैलेंट मैक्सिमस का राजस्व $418 मिलियन (3300 करोड़ रुपये) था। 

फिर की फिल्मों में वापसी

साल 2013 में पूरा खेल तब पलटा जब मणिरत्न ने अपने प्रोजेक्ट ‘कडल’ के लिए उन्हें मना लिया। अरविंद स्वामी अपने गुरु को मना नहीं कर सके और कई सालों बाद उन्होंने दोबारा फिल्मों में वापसी की। इसके बाद से उन्होंने कई अलग-अलग रोल करने शुरू किए। दूसरी पारी में उन्हें वो सफलता नहीं मिली जो करियर की शुरुआत में मिली थी। साल 2021 में उन्होंने बॉलीवुड में भी वापसी की, जब उन्होंने तमिल-हिंदी में बनी ‘थलाइवी’ में कंगना रनौत के साथ एमजी रामचंद्रन की भूमिका निभाई। स्वामी ने 2021 में नेटफ्लिक्स एंथोलॉजी नवरसा की कहानियों से निर्देशन की भी शुरुआत की। वैसे अभी भी वो अपने बिजनेस पर पूरा ध्यान दे रहे हैं।

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