चिनाब ब्रिज के उद्घाटन के बाद पॉपुलर हुईं प्रोफेसर माधवी लता की अपील, “मुझे इस तरह से क्रेडिट न दें”


डॉ. जी माधवी लता

डॉ. जी माधवी लता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में चिनाब ब्रिज का उद्घाटन किया, जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है। जब देश एक ओर इस उपलब्धि का जश्न मना रहा था, तो वहीं दूसरी तरफ प्रोफेसर जी माधवी लता, जो इस प्रोजेक्ट में लंबे वक्त से योगदान दे रही हैं, ने हजारों “गुमनाम नायकों” का आभार व्यक्त किया और लोगों से अपनी “अनावश्यक प्रसिद्धि” से बचने की अपील की।

“मैं उन हजारों में से एक हूं”

डॉ. माधवी लता, जो पुल का निर्माण करने वाली इंजीनियरिंग फर्म एफकॉन्स की भू-तकनीकी सलाहकार थीं, ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में कहा, “मैं लाखों गुमनाम नायकों को सलाम करती हूं। मेरी भूमिका ढलान स्थिरीकरण योजनाओं और ढलान पर नींव के डिजाइन को विकसित करने में मदद करना था।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने 17 वर्षों तक चिनाब ब्रिज पर काम किया है, लेकिन मीडिया की ओर से उन्हें “मिशन के पीछे की महिला” और “ब्रिज बनाने के लिए चमत्कारी काम करने वाली महिला” के रूप में पेश किया जाना बिल्कुल गलत था। उन्होंने इसे “बेसलेस” करार दिया। उन्होंने कहा, “कृपया मुझे अनावश्यक रूप से प्रसिद्ध मत कीजिए। मैं उन हजारों में से एक हूं, जिन्हें चिनाब ब्रिज के लिए सराहा जाना चाहिए।”

बधाई संदेश भेजने वालों को कहा- थैंक्यू

इस समय वे स्पेन में एक सम्मेलन में भाग ले रही हैं और उन्होंने उन सभी को धन्यवाद दिया जिन्होंने उन्हें बधाई संदेश भेजे थे। उन्होंने कहा, “कई पिता ने मुझे लिखकर बताया है कि कि वे चाहते हैं कि उनकी बेटियां मेरी तरह बनें। कई युवा बच्चों ने मुझे पत्र लिखकर बताया है कि वे अब सिविल इंजीनियरिंग में अपना करियर बनाना चाहते हैं।” उन्होंने कहा, “सारी महिमा भारतीय रेलवे की है।” यह कहते हुए उन्होंने भारतीय रेलवे और एफकॉन्स की तारीफ की, जिन्होंने उस कार्य को अंजाम दिया, जिसे कई लोग असंभव कार्य कहते हैं। अग्रणी भू-तकनीकी इंजीनियर डॉ. जी माधवी लता IISc, बेंगलुरु में हायर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (HAG) की प्रोफेसर हैं।

परियोजना को लेकर आईं चुनौतियां

चिनाब ब्रिज का निर्माण उधमपुर-सिरिनगर-बारामुल्ला रेलवे लिंक (USBRL) का हिस्सा है, जिसमें कई बड़ी चुनौतियां थीं, जैसे कठिन भूभाग, भूकंपीय जोखिम और अप्रत्याशित भूविज्ञान। डॉ. लता और उनकी टीम ने इन समस्याओं को एक “डिजाइन-एज़-यू-गो” (Design-as-you-go) दृष्टिकोण के साथ परियोजना को इन जटिलताओं से निपटने में मदद की। इसका मतलब था कि उन्हें वास्तविक समय में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जैसे टूटे हुए चट्टानें और छिपी हुई गुफाएं, जो पहले के सर्वेक्षणों में छूट गए थे।

परियोजना को लेकर पेपर प्रकाशित किया

डॉ. लता ने रॉक एंकर डिजाइन और ढलान स्थिरता पर मार्गदर्शन प्रदान किया, जो इस पैमाने की संरचना के लिए महत्वपूर्ण थे। इस परियोजना को लेकर डॉ. लता ने ‘Design as You Go: The Case Study of Chenab Railway Bridge’ शीर्षक से एक पेपर भी प्रकाशित किया था, जो भारतीय भू-तकनीकी जर्नल के विशेष महिला अंक में था।

एफिल टॉवर से भी ऊंचा चिनाब ब्रिज

चिनाब ब्रिज, जो चेनाब नदी से 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह पुल पेरिस के एफिल टॉवर से भी ऊंचा है। भारतीय रेलवे ने इसे 1486 करोड़ रुपये की लागत से बनाया है और यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है। यह परियोजना भारतीय रेलवे की अब तक की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती मानी जा रही है और इंजीनियरों का मानना है कि इससे कश्मीर घाटी में कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण सुधार होगा। इसे “जीवन में एक बार होने वाली परियोजना” के रूप में देखा जा रहा है।

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