दो महीने में शुरू होगी Starlink की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस? कितने का होगा प्लान, हो गया खुलासा!


Starlink Satellite Broadband, Elon Musk
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स्टारलिंक सैटेलाइड इंटरनेट सर्विस

Starlink सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। पिछले दिनों सरकार ने एलन मस्क की कंपनी को भारत में सर्विस शुरू करने का लाइसेंस मुहैया कराया है। जियो और एयरटेल के बाद स्टारलिंक तीसरी कंपनी बनी है, जिसे सैटेलाइट सर्विस का लाइसेंस मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्टारलिंक भारत में अगले दो महीने में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस लॉन्च कर सकता है। इसके अलावा स्टारलिंक के प्लान की डिटेल्स भी सामने आ गई है।

दो महीने में शुरू होगी सर्विस?

ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस अगले दो महीने में शुरू हो सकती है। हालांकि, सरकार ने अभी स्पेक्ट्रम लाइसेंस किसी भी कंपनी को अलॉट नहीं किया है। दूरसंचार विभाग और दूरसंचार नियामक जल्द ही सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर्स को स्पेक्ट्रम लाइसेंस आवंटित कर सकती है। पिछले दिनों दूरसंचार नियामक ने कहा था कि सर्विस प्रोवाइडर्स को सैटेलाइट सर्विस के लिए स्पेक्ट्रम लाइसेंस प्रशासनिक तरीके से अलॉट किया जाएगा। मोबाइल सर्विसेज की तरह स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं होगी।

कितने का होगा प्लान?

सूत्रों की मानें तो भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट सर्विस के लिए हर महीने 3,000 रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। Starlink सैटेलाइट सर्विस के लिए डिवाइस की कीमत 33,000 रुपये रखी जा सकती है। यानी सैटेलाइट सर्विस लेने वाले यूजर को पहले 36,000 रुपये खर्च करने होंगे। इसके बाद हर महीने 3,000 रुपये का खर्च आएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टारलिंक पहले महीने का रेंट यूजर्स से नहीं लेगा। कंपनी लॉन्च स्ट्रेटेजी के तहत पहले महीने के लिए कंप्लिमेंटरी प्लान ऑफर करेगी।

भारत के पड़ोसी देशों भूटान और बांग्लादेश में भी स्टारलिंक के डिवाइस की कीमत 33,000 रुपये है। कंपनी भारतीय प्रायद्वीप में अपनी सर्विस के लिए लगभग एक जैसा चार्ज ले सकती है। स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस का फायदा उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए होगा, जहां मोबाइल नेटवर्क की बेहतर सुविधा नहीं है। हालांकि, दूरसंचार कंपनियों का कहना है कि भारत के 95 प्रतिशत से ज्यादा एरिया में 4G/5G सर्विस पहुंचा दी गई है।

सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस लॉन्च होने का फायदा खास तौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को होगा। इसके अलावा इमरजेंसी के समय भी यूजर्स डायरेक्ट-टू-सेल टेक्नोलॉजी का फायदा उठाकर कॉलिंग और इंटरनेट सर्विस ले सकते हैं।

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