पीएम मोदी 15 नवंबर को करेंगे बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का निरीक्षण, 2027 में शुरू होगा ट्रायल


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Photo:NHSRCL दिन-रात चल रहा है अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का काम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अहमदाबाद और मुंबई के बीच बनाए जा रहे देश के पहले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के निर्माण कार्य का जायजा लेंगे। पीएम मोदी पहली बार इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का जायजा लेने के लिए ग्राउंड पर पहुंचेंगे और करीब से प्रोजेक्ट का कामकाज देखेंगे। पीएम मोदी 15 नवंबर को सूरत के अत्रोली में बनाए जा रहे सूरत स्टेशन पहुंचेंगे और कार्यों का निरीक्षण करेंगे। गुजरात के अहमदाबाद और महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के बीच बनाए जा रहे इस 508 किमी लंबे कॉरिडोर के पहले चरण के तहत, सूरत-बिलिमोरा सेक्शन पर दिसंबर 2027 में ट्रायल शुरू होने की संभावना हैं।

दिन-रात चल रहा है अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का काम

अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर दिन-रात काम चल रहा है। गुजरात के वडोदरा जिले में विश्वामित्री नदी पर पुल का निर्माण पूरा कर लिया गया है। ये परियोजना के लिए गुजरात में नदियों के ऊपर बनने वाले 21 पुलों में से पूरा होने वाला 17वां पुल है। 80 मीटर लंबा ये पुल पश्चिम रेलवे की वडोदरा-सूरत मुख्य लाइन के पास स्थित है। इस पुल में तीन पियर हैं, जिनमें से एक नदी की धारा में और दो नदी के किनारे (दोनों तरफ एक-एक) स्थित है। बताते चलें कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर नदियों पर कुल 25 पुल हैं, जिनमें से 21 गुजरात में और 4 महाराष्ट्र में हैं।

शिलफाटा और घनसोली के बीच 4.88 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई का काम पूरा

इस साल जुलाई में, महाराष्ट्र में घनसोली और शिलफाटा के बीच समुद्र के अंदर कुल 21 किलोमीटर लंबी सुरंग के 2.7 किमी लंबे पहले सेक्शन का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया था। सितंबर में शिलफाटा और घनसोली के बीच 4.88 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई का काम भी पूरा हो गया था। इसके अलावा, बुलेट ट्रेन के लिए पटरियां बिछाने, ओवरहेड इलेक्ट्रिकल वायरिंग, स्टेशनों और पुलों का काम भी तेजी से चल रहा है। 

नदी के ऊपर बन रहे 15 पुलों का काम पूरा

रेल मंत्रालय द्वारा जुलाई में जारी किए गए बयान के मुताबिक, प्रोजेक्ट के तहत नदी के ऊपर बन रहे 15 पुलों का काम पूरा हो चुका है, जबकि चार पुलों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। कुल 12 स्टेशनों में से 5 का काम पूरा हो चुका है और 3 और स्टेशनों का काम अब अंतिम चरण में पहुंच गया हैं। मंत्रालय ने कहा था, ‘‘बीकेसी स्टेशन इंजीनियरिंग का चमत्कार होगा। ये स्टेशन जमीन से 32.5 मीटर नीचे स्थित होगा और इसकी नींव को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसके ऊपर 95 मीटर ऊंची इमारत का निर्माण किया जा सके।’’

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