श्रेयस तलपड़े और आलोक नाथ को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, धोखाधड़ी मामले में होने वाली थी गिरफ्तारी


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Image Source : IMDB, SHREYASTALPADE27/INSTAGRAM
अलोक नाथ और श्रेयस तलपड़े।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अभिनेता श्रेयस तलपड़े और आलोक नाथ को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने कोऑपरेटिव सोसाइटी से जुड़े धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के मामले में जांच पूरी होने तक दोनों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने श्रेयस तलपड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए पहले से मिली गिरफ्तारी से सुरक्षा को जारी रखने का फैसला किया। कोर्ट उन याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रहा है, जिनमें दोनों एक्टर्स ने अलग-अलग राज्यों में दर्ज FIR को एक साथ जोड़ने की मांग की है।

क्या है श्रेयस तलपड़े और अलोक नाथ का कहना?

सुनवाई के दौरान श्रेयस तलपड़े के वकील ने कहा कि अभिनेता कंपनी के एक सालाना कार्यक्रम में सिर्फ मेहमान के तौर पर गए थे। उन्हें सोसाइटी के कामकाज या पैसों से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी नहीं थी और न ही उन्होंने इससे कोई पैसा कमाया। वहीं आलोक नाथ के वकील ने बताया कि उनके मुवक्किल किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए थे। उन्होंने दावा किया कि पिछले करीब 10 सालों से सोसाइटी उनकी तस्वीर का इस्तेमाल बिना अनुमति के कर रही थी।

कोर्ट ने खड़े किए सवाल

इस दौरान कोर्ट ने एक अहम सवाल उठाया। अदालत ने पूछा कि क्या किसी विज्ञापन में दिखने वाले या ब्रांड एंबेसडर बने अभिनेता या खिलाड़ी को तब जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जब वह कंपनी बाद में धोखाधड़ी या किसी अपराध में शामिल पाई जाए। इसके बाद कोर्ट ने श्रेयस तलपड़े को दी गई सुरक्षा को जांच पूरी होने तक जारी रखने का आदेश दिया। यह मामला हरियाणा के सोनीपत निवासी 37 वर्षीय विपुल अंतिल की शिकायत से जुड़ा है। उनकी शिकायत पर 22 जनवरी को FIR दर्ज की गई थी। इस FIR में श्रेयस तलपड़े और आलोक नाथ समेत कुल 13 लोगों के नाम हैं। आरोप है कि इन लोगों ने ह्यूमन वेलफेयर क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड को प्रमोट किया था।

इन धाराओं में दर्ज है FIR

पुलिस का कहना है कि मशहूर चेहरों से जुड़ाव होने के कारण लोगों को सोसाइटी में निवेश करने के लिए आकर्षित किया गया। पुलिस के मुताबिक, दोनों अभिनेताओं के नाम शिकायत में हैं और अब यह जांच की जाएगी कि उनकी भूमिका क्या थी। यह FIR भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(2), 318(2) और 318(4) के तहत दर्ज की गई है, जिनमें धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि सोसाइटी ने वित्तीय योजनाओं के जरिए आम लोगों को धोखा दिया।

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