चीन में लॉन्च हुए फोन में भारत की टेक्नोलॉजी, ISRO का नेविगेशन सिस्टम दे रहा अमेरिकी GPS को चुनौती


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Image Source : HONOR CHINA WEBSITE SCREENGRAB
ऑनर पावर 2 लॉन्च

चीनी कंपनी Honor ने Power 2 स्मार्टफोन को घरेलू मार्केट में पेश किया है। इस स्मार्टफोन की खास बात ये है कि इसमें 10,800mAh की तगड़ी बैटरी मिलती है। चीनी ब्रांड ने इसमें भारत के ISRO द्वारा डेवलप की गई पोजिशनिंग टेक्नोलॉजी NavIC का इस्तेमाल किया है। इसरो की यह टेक्नोलॉजी अमेरिकी मिलट्री द्वारा डेवलप किए गए GPS को टक्कर देता है और एक्यूरेसी यानी सटिकता के मामले में बेहतर माना जाता है।

ऑनर चाइना वेबसाइट के मुताबिक, Honor Power 2 में पोजिशन फीचर के लिए NavIC (L5) का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा फोन में GPS, A-GNSS, GLONASS (G1) जैसे फीचर्स भी दिए गए है। यह पोजिशनिंग टेक्नोलॉजी डिवाइस के अलग-अलग रीजन में इस्तेमाल किए जाने पर उसकी लोकेशन के लिए इस्तेमाल की जाती है।

क्या है NavIC?

NavIC यानी नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टिलेशन सिस्टम को ISRO ने डेवलप किया है। इसे पूरी तरह से भारत द्वारा कंट्रोल किया जाता है। इस टेक्नोलॉजी की खास बात ये है कि इसके हर कंपोनेंट को भारत में ही बनाया गया है। आम भाषा में कहा जाए तो यह पूरी तरह से स्वदेशी टेक्नोलॉजी है। NavIC में भारत के जमीनी सीमा से 1500 किलोमीटर बाहर तक का एरिया कवर होता है। हालांकि, आने वाले समय में एरिया के कवरेज को बढ़ाया जाएगा।

NavIC, ISRO

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नाविक भारत का स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम

NavIC में सैटेलाइट्स, स्टैंडर्ड पॉजिशनिंग सर्विस (SPS) और रिस्ट्रिक्टेड सर्विस (RS) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। यह L5 और S बैंड पर काम करता है। भविष्य में इसमें L1 बैंड का भी सपोर्ट मिलेगा। इस टेक्नोलॉजी को इसरो ने 2018 में डेवलप किया है। सरकार ने भारत में लॉन्च होने वाले स्मार्टफोन में NavIC कंपैटिबल बनाना अनिवार्य कर दिया है, ताकि रिजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (RNSS) को बेहतर किया जा सके। 

GPS को चुनौती

GPS यानी ग्लोबल पॉजिशनिंग सिस्टम को अमेरिकी मिलिट्री ने डेवलप किया है। इसमें धरती के चक्कर लगा रही 31 सैटेलाइट ऑर्बिट्स को कवर किया गया है। इस समय लॉन्च होने वाले मोबाइल डिवाइस, ट्रैकर में GPS का इस्तेमाल किया जाता है। यह GNSS यानी ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम पर काम करता है, जिसकी वजह से पूरी दुनिया में पेश किए जाने वाले मोबाइल डिवाइस में यह यूज किया जाता है। इसकी मदद से ही डिवाइस की लोकेशन ट्रैक की जा सकती है। ISRO द्वारा डेवलप किया गया NavIC आने वाले समय में GPS के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।

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