लोहड़ी की आग में क्यों डालते हैं मूंगफली, गजक, रेवड़ी और तिल? जानें इसके पीछे का दिलचस्प फैक्ट्स


लोहड़ी की आग में क्यों डालते हैं मूंगफली?- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK
लोहड़ी की आग में क्यों डालते हैं मूंगफली?

लोहड़ी का त्यौहार मुख्य रूप से नई फसल की कटाई और खुशहाली के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। यह सर्दियों के सबसे छोटे दिनों के अंत और लंबे, गर्म दिनों की शुरुआत का प्रतीक है। इस खास मौके पर लोग लोहड़ी की आग के चारों ओर इकट्ठा होकर पारंपरिक गीत गाते हैं और अग्नि में मूंगफली, गजक, रेवड़ी और तिल डालते हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है कि ऐसा क्यों किया जाता है, क्या है इसके पीछे की वजह। अगर नहीं, तो यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि लोहड़ी की अग्नि में मूंगफली क्यों डाली जाती है।

नई फसल का अर्पण

लोहड़ी को ‘कटाई का त्यौहार’ माना जाता है। किसान अपनी नई फसल (जैसे मूंगफली, तिल और गुड़) का पहला हिस्सा अग्नि देव को समर्पित करते हैं। यह भगवान के प्रति आभार व्यक्त करने का एक तरीका है कि उनकी कृपा से फसल अच्छी हुई।

सूर्य देव का स्वागत

लोहड़ी मकर संक्रांति से एक रात पहले मनाई जाती है। यह समय सर्दियों के अंत और सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है। आग में मूंगफली और अन्य चीजें अर्पित करके हम सूर्य देव और अग्नि देव से आने वाले साल में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

वैज्ञानिक और स्वास्थ्य कारण

सर्दियों का भोजन: मूंगफली, तिल और गुड़ शरीर को गर्माहट देते हैं। आग के चारों ओर बैठकर इन्हें खाने और अग्नि में अर्पित करने से वातावरण में एक खास ऊर्जा पैदा होती है।

वातावरण की शुद्धि: अग्नि में तिल और मूंगफली जैसी चीजें डालने से निकलने वाला धुआं वातावरण को शुद्ध करने में मदद करता है।

“ईशर आए, दलिद्दर जाए”

लोहड़ी की आग में चीजें डालते समय एक लोकप्रिय कहावत बोली जाती है— “ईशर आए, दलिद्दर जाए”। इसका अर्थ है कि घर में संपन्नता आए और दरिद्रता दूर हो जाए। मूंगफली और रेवड़ी को प्रसाद के रूप में बांटकर लोग आपसी भाईचारा बढ़ाते हैं।

 

Latest Lifestyle News





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *