Mayawati Ghooskhor Pandat Controversy: ‘घूसखोर पंडत’ से मायावती कर रहीं सोशल इंजीनियरिंग! जानें 2007 में ब्राह्मणों ने BSP के हाथी को बढ़ाने के लिए क्यों बजाया था शंख


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जानें कहानी 2007 की जब BSP के ब्राह्मणों ने हाथी को बढ़ाने के लिए शंख बजाया था।

BSP Brahmin Votebank: बॉलीवुड की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के नाम को लेकर चल रहे विवाद के बीच BSP प्रमुख मायावती, ब्राह्मणों के साथ खड़े होने की कोशिश करती दिखाई दीं। उन्होंने ब्राह्मण समाज के सपोर्ट में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और इसको लेकर सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि मायावती, ब्राह्मणों पर इतना मेहरबान क्यों हैं? दरअसल, मायावती यूपी में 2012 से सत्ता से बाहर हैं। दलितों की नेता मायावती यूपी की चार बार मुख्यमंत्री रहीं, एक बार 1995 में समाजवादी पार्टी और दो बार 1997 और 2002 में बीजेपी की मदद से। 3 बार गठबंधन सरकार बनाने के बाद मायावती ने 2007 में यूपी में नया प्रयोग किया। दलित के साथ बड़े पैमाने पर मुस्लिम वोट तो मायावती के साथ था ही, उन्होंने ब्राह्मणों को भी BSP से जोड़ा।

जब सोशल इंजीनियरिंग करके ब्राह्मणों को BSP से जोड़ा

यूपी में 2007 के विधानसभा चुनाव में मायावती ने 86 ब्राह्मणों को टिकट दिया। मायावती ने इसे सोशल इंजीनियरिंग का नाम दिया। बीएसपी के चुनाव चिन्ह हाथी की पहचान दलितों से थी, लेकिन सोशल इंजीनियरिंग के बाद अब बीएसपी के नए नारे हो गए ‘ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा।’ और ‘हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा विष्णु महेश है।’

2007 की सरकार में 7 ब्राह्मणों को बनाया मंत्री

साथ ही, मायावती ने ब्राह्मण भाईचारा समिति बनाई और खुद कई ब्राह्मण सम्मेलनों को संबोधित किया। 2007 में मायावती की सोशल इंजेनयरिंग काम आई और 41 ब्राह्मण बसपा के टिकट से जीत गए और मायावती की बहुमत की सरकार बन गई। मायावती ने 7 ब्राह्मणों को सरकार में मंत्री भी बनाया।

क्या 2007 वाला फॉर्मूला दोहरा पाएंगी मायावती?

फिलहाल, यूपी में मायावती 2012 से सत्ता से बाहर हैं। लोकसभा में बीएसपी का एक भी सांसद नहीं है और विधानसभा में सिर्फ एक विधायक। अब मायावती ब्राह्मणों के साथ खड़ी दिखकर फिर से 2007 का सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला दोहराने की कोशिश में दिख रही हैं। अभी 15 जनवरी को अपने जन्मदिन पर मायावती ने कहा कि बसपा हमेशा ब्राह्मणों का सम्मान करती आई है और 2027 में यूपी में सरकार बनी तो ब्राह्मणों को पूरा सम्मान दिया जाएगा।

19 साल पहले ब्राह्मण क्यों आए थे मायावती के साथ?

जानकार कहते हैं कि 2007 और 2026 में 19 साल का फासला है। इस दौरान, यूपी की सियासत बहुत बदल चुकी है। मायावती से दलित वोट भी काफी तादाद में खिसक गया है। यूपी में 2007 में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी और सरकार के खिलाफ माहौल था। यूपी में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही कमजोर थीं, ऐसे में ब्राह्मण मायावती के साथ चल गया।

अब 2014 से यूपी में बीजेपी की ताकत बढ़ी तो ब्राह्मण वोटर बीजेपी में चला गया। प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने इंडिया टीवी से कहा, ‘मायावती चाहे कितनी भी कोशिश कर लें सवर्ण, खासतौर से ब्राह्मण उनके साथ नहीं जाने वाला। सवर्ण, ब्राह्मण सनातनी रहा है, सनातन का मतलब भाजपा है और ब्राह्मण बीजेपी से दूर जा ही नहीं सकता।’

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