
महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। जानकारी के मुताबिक, राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के तुरंत बाद अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र जारी किए जाने के मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। 28 से 31 जनवरी 2026 के बीच 75 शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। यह वही अवधि थी जब राज्य में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित था।
सूत्रों के अनुसार, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पुष्टि की है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। यह जांच की जा रही है कि संबंधित संस्थानों की फाइलों पर पहले ही अजीत पवार के हस्ताक्षर हो चुके थे या उनके निधन के बाद किसी स्तर पर अनियमितता या हेरफेर की गई।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली और संपन्न शैक्षणिक संस्थानों को अधिकारियों की मिलीभगत से अल्पसंख्यक दर्जा दिलाने की कोशिश की गई। कांग्रेस ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों को निलंबित किया जाए और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
