
शाहपुर कांडी डैम
नई दिल्ली: इस बार गर्मी का मौसम पाकिस्तान के लिए सूखे का एक बड़ा संकट लेकर आने वाली हैं। इस मौसम में पाकिस्तान बूंद-बूंद पानी को तरसेगा। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से सिंधु जल समझौते को रद्द किए जाने से पहले से ही वह पानी की किल्लतें झेल रहा है, लेकिन अब भारत शाहपुर कंडी बैराज के पूरा होने के साथ रावी नदी से ज़्यादा पानी के फ्लो को रोकने वाला है। इससे पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। जानकारी के मुताबिक शाहपुर कंडी बैराज का काम 31 मार्च तक पूरा जाएगा। अब तक स्टोरेज सुविधाओं की कमी के कारण रावी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान में जा रहा था।
जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद राणा की ओर से इस डैम को लेकर अपडेट दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद सूखे से जूझ रहे कठुआ और सांबा जिलों में सिंचाई की सुविधा देना है। उन्होंने कहा कि इस डैम से पाकिस्तान की ओर जानेवाले ज्यादा पानी के बहाव को रोका जाएगा और जम्म-कश्मीर की जनता को पर्याप्त पानी मुहैया कराया जाएगा।
46 साल का अधूरा सपना हुआ पूरा
रावी नदी पर इस डैम प्रोजेक्ट की कल्पना 1979 में की गई। पाकिस्तान की ओर बहने वाले अतिरिक्त पानी रोकने के लिए रंजीत सागर डैम और नीचे की तरफ शाहपुर कंडी बैराज बनाने के लिए पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच एक एग्रीमेंट साइन किया गया था। 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस प्रोजेक्ट की नींव रखी थी। लेकिन बाद के वर्षों में पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच आपसी विवादों और राजनीतिक उपेक्षा के कारण यह प्रोजेक्ट 46 साल तक लटका रहा। वर्ष 2018 में मोदी सरकार ने इस प्रोजेक्ट में दखल दिया और इसके बाद इस पर काम ने रफ्तार पकड़ी।
यह प्रोजेक्ट 32,000 हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन की सिंचाई में मदद करेगा। पूरी तरह से चालू होने के बाद, पंजाब में 5,000 हेक्टेयर से ज़्यादा खेती की ज़मीन को फायदा होने की उम्मीद है।
पाकिस्तान पर क्या होगा असर?
पाकिस्तान एक कृषि प्रधान देश है। पाकिस्तान की GDP में खेती का हिस्सा 25% है। उसकी 80% खेती सिंधु नदी सिस्टम पर निर्भर है। लेकिन भारत की अपनाए गए कड़े रुख के चलते उसकी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। रावी का अतिरिक्त पानी रोके जाने से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सिंचाई व्यवस्था चरमरा सकती है। इतना ही नहीं लाहौर और मुल्तान जैसे बड़े शहरों की जलापूर्ति पर सीधा असर पड़ेगा। वहीं पानी की कमी से फसलों का उत्पादन घटेगा और पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को बड़ा झटका लगेगा।
सिंधु जल संधि का उल्लंघन नहीं
भारत का यह कदम पूरी तरह नियमों के मुताबिक हैं। क्योंकि 1960 की सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चिनाब पर अधिकार दिए गए थे जबकि तीन पूर्वी नदियों—सतलुज, ब्यास और रावी—के पानी पर भारत का पूर्ण अधिकार है। इन नदियों के पानी को बिना रोक-टोक इस्तेमाल की इजाज़त भारत को मिली हुई है। अब तक बुनियादी ढांचा न होने के कारण जो पानी पाकिस्तान बह जाता था, भारत अब उसी बर्बादी को रोक रहा है।
आतंकवाद को लेकर भारत का कड़ा रुख
पिछले साल अप्रैल महीने में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सख्त रुख अपनाने हुए सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया था। वहीं भारत ने जम्मू और कश्मीर में चिनाब नदी पर कई हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट्स पर काम तेज़ कर दिया है। इसके 2027-28 तक पूरा होने की उम्मीद है, जिससे पानी का बहाव और कम हो जाएगा। इसके अलावा, भारत झेलम नदी से पानी के स्टोरेज को रेगुलेट करने के लिए रुके हुए वुलर बैराज पर भी काम फिर से शुरू करने वाला है।
