
अमित मालवीय और ममता बनर्जी
नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ज्यादा दिन बाकी नहीं रह गए हैं लेकिन पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक लाभ लेने की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा युवाओं के लिए शुरू की गई ‘युवा साथी’ (Yuva Sathi) योजना को लेकर बीजेपी आईटी सेल प्रमुख और बंगाल के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने बड़ा हमला बोला है। उन्होंने ममता सरकार के उन दावों पर सवाल उठाए हैं जिनमें बंगाल में 2 करोड़ नौकरियां देने की बात कही गई थी।
दावा 2 करोड़ नौकरियों का, हकीकत 13 लाख बेरोजगार
अमित मालवीय ने कहा कि यह विडंबना ही है कि जो टीएमसी की सरकार पिछले एक दशक से बंगाल में 2 करोड़ नौकरियां पैदा करने का ढिंढोरा पीट रही थी, वही अब बेरोजगारी भत्ता योजना (युवा साथी) में महज 48 घंटों के भीतर 13 लाख रजिस्ट्रेशन होने पर विजय का जश्न मना रही है। अमित मालवीय के मुताबिक इतनी बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन ममता सरकार की विफलता का जीता-जागता सबूत है।
क्या ये नाकामी का सबूत नहीं है?
उन्होंने एक्स पर लिखा-“क्या यह ममता बनर्जी सरकार की पूरी तरह नाकामी का सबूत नहीं है? सालों तक रोज़गार पैदा करने के बड़े-बड़े दावों के बाद, टैक्सपेयर्स के करोड़ों पैसे विदेशी यात्राओं और बड़े-बड़े “बिस्वा बंग” शो पर खर्च करने के बाद, सरकार अब बंगाल के युवाओं को 1,500 रुपये की खैरात देकर खुश करना चाहती है।”
भाजपा नेता ने सरकार पर पुरानी योजनाओं को नया नाम देकर पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने याद दिलाया कि 2013 में ‘युवाश्री’ योजना बड़े तामझाम के साथ शुरू की गई थी, जिसमें 1500 रुपये प्रति माह देने का वादा किया गया था। लेकिन उसके आवेदक आज भी अपने हक का इंतजार कर रहे हैं।
‘युवा साथी”युवाश्री’का रीसायकल वर्जन
अमित मालवीय ने लिखा-” हमें यह नहीं भूलना चाहिए: 2013 में, सरकार ने बहुत धूमधाम से युवाश्री शुरू की थी, जिसमें बेरोज़गार युवाओं को हर महीने 1,500 रुपये देने का वादा किया गया था। इसे एक बड़ी स्कीम बताया गया था। फिर भी 2017-18 के बाद, एलोकेशन लगभग खत्म हो गया, जिससे हज़ारों एप्लीकेंट, जिनमें से कई 2013-14 बैच के थे, सालों तक बिना अपने हक का इंतज़ार करते रहे। मालवीय ने कहा कि ‘युवा साथी’ कुछ और नहीं बल्कि ‘युवाश्री’ का ही रीसायकल किया हुआ रूप है।
नाम बदलने से नौकरियां नहीं बनतीं
अमित मालवीय ने लिखा, “युवाश्री का क्या हुआ? बड़ी-बड़ी घोषणाओं के बावजूद इतने सारे युवा एप्लीकेंट को फ़ायदे क्यों नहीं दिए गए? रुकी हुई स्कीम का नाम बदलने से नौकरियां नहीं बनतीं। वादों को दोहराने से भविष्य नहीं बनता। बंगाल के युवा दिखावे से ज़्यादा चाहते हैं। वे अच्छी शिक्षा, असली रोज़गार के मौके और इज़्ज़त के साथ गुज़ारा चाहते हैं, न कि चुनाव से पहले समय-समय पर घोषित होने वाले भत्ते। बंगाल का भविष्य पुरानी स्कीमों और हेडलाइन मैनेजमेंट से नहीं बनाया जा सकता।”
