
सांकेतिक तस्वीर
झारखंड के 48 शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव के वोटों की गिनती हो रही है। राज्य में 9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायतों में मेयर, उप-मेयर और वार्ड पार्षद मिलकर शहर की बुनियादी सुविधाओं को संचालित करते हैं। झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 के तहत इन पदों की शक्तियां और जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं, जो शहर के विकास से जुड़ी हैं।
शहर का सर्वोच्च नागरिक माना जाता है मेयर
मेयर नगर निगम या निकाय का सर्वोच्च निर्वाचित पदाधिकारी होता है। वह शहर का ‘सर्वोच्च नागरिक’ माना जाता है और बोर्ड की बैठकों की अध्यक्षता करता है। अधिनियम के अनुसार मेयर की कई शक्तियां होती हैं।
मेयर के पास होती हैं ये शक्तियां
- नगर निकाय बोर्ड की सभी बैठकों की अध्यक्षता करना और चर्चा को संचालित करना।
- बोर्ड द्वारा पारित प्रस्तावों को लागू करवाने की निगरानी करना।
- स्थायी समितियों और अन्य समितियों की बैठकों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना।
- नगर आयुक्त के साथ मिलकर विकास योजनाओं, बजट और नीतियों पर निर्णय लेना।
- आपात स्थिति में कुछ शक्तियों का प्रयोग करना, जैसे अस्थायी आदेश जारी करना।
- उप-महापौर को कुछ शक्तियां प्रत्यायोजित करने का अधिकार।
- शहर की ओर से सरकारी कार्यक्रमों, समारोहों में प्रतिनिधित्व करना।
वार्ड पार्षद की शक्तियां और कर्तव्य
- वार्ड पार्षद अपने निर्वाचन क्षेत्र (वार्ड) के प्रतिनिधि होते हैं और नगर निकाय बोर्ड के सदस्य होते हैं। उनकी भूमिका ग्राउंड लेवल पर सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। पार्षदों की कई जिम्मेदारियां हैं।
- अपने वार्ड में सफाई, पेयजल आपूर्ति, सड़क-नाली की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, पार्क और अन्य नागरिक सुविधाओं की निगरानी करना।
- वार्ड समिति के अध्यक्ष के रूप में काम करना (कुछ निकायों में) और स्थानीय समस्याओं को बोर्ड तक पहुंचाना।
- विकास कार्यों के प्रस्ताव रखना, बजट में वार्ड के लिए फंड की मांग करना।
- जनता की शिकायतें सुनना और उनका निस्तारण करवाना।
- बोर्ड की बैठकों में भाग लेना, मतदान करना और नीतियां बनाने में योगदान देना।
- स्थानीय स्तर पर सरकारी योजनाओं (जैसे स्वच्छ भारत मिशन, अमृत योजना) के क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग करना।
- पार्षद सीधे तौर पर फाइलें मंजूर नहीं करते, लेकिन उनकी सिफारिश और निगरानी से ज्यादातर छोटे-मोटे कार्य होते हैं। वे जनता और प्रशासन के बीच पुल का काम करते हैं।
बता दें कि निकाय चुनावों के बाद शहरवासियों को उम्मीद रहती है कि मेयर और पार्षद मिलकर बेहतर सफाई, पानी, सड़क और शहरी सुविधाएं सुनिश्चित करेंगे। लेकिन शक्तियों का असली असर तभी दिखता है, जब निर्वाचित प्रतिनिधि और प्रशासनिक तंत्र में बेहतर तालमेल हो।
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