Mobile phone journey

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मोबाइल फोन

भारत में मोबाइल यूजर्स की संख्यां 116 करोड़ के पार पहुंच गया है। हाल में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में यह जानकारी दी है। पिछले 10 साल में भारत में मोबाइल यूजर्स की संख्यां तेजी से बढ़े हैं। खास तौर पर 5G यूजर्स की संख्यां काफी तेजी से बढ़ रही है। 2022 में 5G सेवा शुरू होने के बाद से देश के 98 प्रतिशत जिलों में 5G पहुंच गया है। वहीं, मोबाइल इंटरनेट यूजर्स की संख्यां में भी बंपर उछाल देखा गया है। स्मार्टफोन के आने से पहले बटन वाले यानी फीचर फोन यूज किए जाते थे। हालांकि, अब फीचर फोन यूजर्स की संख्यां भारत में काफी कम रह गई है।

30 साल पहले शुरू हुई मोबाइल सर्विस

मोबाइल फोन को भारत में आए लगभग 30 साल हो गए हैं। 31 जुलाई 1995 को पहली बार भारत में मोबाइस सर्विस की शुरुआत हुई थी। अब मोबाइल यूजर्स की संख्यां 116 करोड़ के पार पहुंच गई है। 1995 से लेकर 2025 तक मोबाइल फोन पूरी तरह से बदल गया है। इस समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल केवल कॉलिंग के लिए नहीं किया जाता है। अभी यूज होने वाले मोबाइल फोन स्मार्ट हो गए हैं और इसका इस्तेमाल बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, फूड ऑर्डर, मैप, कैब बुकिंग जैसी कई सर्विसेज के लिए किया जाता है।

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मोदी टेल्स्ट्रा के नेटवर्क पर हुई कॉल

इस समय भारत में मोबाइल सर्विस मुहैया कराने वाली चार प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर्स हैं, जिनमें एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया, जियो और बीएसएनएल शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली और मुंबई में एमटीएनएल अपनी मोबाइल सर्विस मुहैया कराता है लेकिन 1995 में इनमें से किसी कंपनी ने भारत में मोबाइल सर्विस की शुरुआत नहीं की थी। मोदी टेल्स्ट्रा नाम की कंपनी को भारत में मोबाइल सर्विस शुरू करने का श्रेय जाता है। मोदी टेल्स्ट्रा ने अपनी मोबाइल सर्विस का नाम मोबाइल नेट रखा था। उस समय नोकिया और सीमेंस के हैंडसेट के जरिए मोबाइल सर्विस की शुरुआत की गई थी।

कोलकाता और दिल्ली के बीच किया गया कॉल

मोदी टेल्स्ट्रा बाद में स्पाइस टेलीकॉम के नाम से अपनी सर्विस देने लगी। भारत में मोबाइल सर्विस का लाइसेंस प्राप्त करने वाली शुरुआती 8 कंपनियों में से मोदी टेल्स्ट्रा एक है। 31 जुलाई 1995 को भारत में पहली मोबाइल कॉल की गई थी। यह कॉल पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने उस समय के केंद्रीय मंत्री सुखराम को की थी। कोलकाता में मोदी टेल्स्ट्रा के नेटवर्क का इस्तेमाल करके यह कॉल किया गया था। इस कॉल को करने के लिए ज्योति बसु ने नोकिया 2110 हैंडसेट का इस्तेमाल किया गया था। यह मोबाइल कॉल कोलकाता के राइटर्स बिल्डिंग से दिल्ली के संचार भवन के बीच किया गया था।

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इनकमिंग कॉल के 8 रुपये प्रति मिनट

1995 में मोबाइल फोन पर आउटगोइंग के साथ-साथ इनकमिंग कॉल के लिए भी चार्ज देना पड़ता था। उस समय आउटगोइंग कॉल के लिए 16 रुपये प्रति मिनट और इनकमिंग कॉल के लिए 8 रुपये प्रति मिनट का खर्च आता था। यही नहीं, मोबाइल का सिम कार्ड खरीदने के लिए भी यूजर को 4,900 रुपये देने पड़ते थे। यही कारण था कि 1995 से लेकर 2000 के बीच महज भारत में मोबाइल यूजर्स की संख्यां केवल 10 लाख ही पहुंच पाई थी।

फ्री इनकमिंग कॉल

मोबाइल यूजर्स का स्वर्णिम दौर साल 2003 में शुरू हुआ जब दूरसंचार मंत्रालय ने कॉलिंग पार्टी पेज (CPP) लागू किया। इसके बाद मोबाइल पर इनकमिंग कॉल को फ्री कर दिया गया। वहीं, लैंडलाइन पर कॉल करने की दर भी 1.20 रुपये प्रति मिनट कर दिया गया। फ्री इनकमिंग कॉल की वजह से मोबाइल यूजर्स की संख्यां तेजी से बढ़ने लगी और मोबाइल फोन की डिमांड भी बढ़ने लगी।

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2008 में 3G सर्विस की शुरुआत हुई और 2012 आते-आते 4G सर्विस भारत में लॉन्च हो गई है। 4G सर्विस लॉन्च होते ही भारत में मोबाइल इंटरनेट यूजर्स की संख्यां बढ़ने लगी और अब भारत मोबाइल यूजर्स के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।

मोबाइल से पहले पेजर सर्विस

भारत में मोबाइल सर्विस शुरू होने से दो महीने पहले पेजर सर्विस की भी शुरुआत की गई थी। पेजर सर्विस का इस्तेमाल केवल वन वे कम्युनिकेशन के लिए किया जाता था। यह सर्विस किसी टेलीग्राम की तरह काम करता था, जिसमें किसी भी पेजर यूजर को संदेश भेजा जा सकता था। संदेश प्राप्त होने पर पेजर की स्क्रीन पर नोटिफिकेशन दिखता था, जिसमें भेजा गया मैसेज पढ़ा जा सकता था। 

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