
पूजा डडवाल।
बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया के पीछे कई सितारों की जिंदगी में अंधेरे के ऐसे दौर भी आए हैं, जिनसे उबरना आसान नहीं था। कई कलाकारों ने गंभीर बीमारियों का सामना किया है, कुछ ने इनसे लड़कर जीत हासिल की तो कुछ के करियर और जिंदगी पर इनका गहरा असर पड़ा। ऐसी ही एक अभिनेत्री हैं पूजा डडवाल, जिन्होंने साल 1995 में सलमान खान के साथ फिल्म ‘वीरगति’ से डेब्यू किया था। फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन पूजा के अभिनय को लोगों ने नोटिस जरूर किया। उस वक्त पूजा केवल 18 साल की थीं और सलमान जैसे बड़े सितारे के साथ स्क्रीन शेयर करना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था।
पूजा डडवाल थीं एक उभरता सितारा
5 जनवरी 1977 को जन्मी पूजा डडवाल का सपना एक सफल अभिनेत्री बनने का था। वीरगति से डेब्यू करने के बाद उन्होंने कुछ और फिल्मों और शोज में काम किया, जिनमें टीली शो ‘आशिकी’ (1999) और ‘घराना’ (2001) शामिल था। हालांकि, लगातार फ्लॉप फिल्मों और कमजोर स्क्रिप्ट्स के चलते उनका करियर ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच सका। जल्द ही उन्होंने टेलीविजन की ओर रुख किया, लेकिन यहां भी उन्हें वैसी सफलता नहीं मिली जैसी उन्होंने कल्पना की थी। कुछ समय बाद पूजा ने फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली और शादी करके गोवा में बस गईं, जहां उन्होंने अपने पति के साथ कैसीनो बिजनेस संभालना शुरू किया।
पूजा डडवाल।
बीमारी और अकेलेपन का दौर
पूजा की जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ 2018 में आया, जब उन्हें टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) होने का पता चला। बीमारी का पता चलते ही उनके पति और ससुराल वालों ने उनसे नाता तोड़ लिया और वह मुंबई में अकेली और लाचार रह गईं। इलाज के लिए पैसे नहीं थे, रहने की जगह नहीं थी और न ही कोई सहारा। साल 2019 में जब उनकी हालत और बिगड़ने लगी तो पूजा ने मदद की गुहार लगाई। उन्होंने सोशल मीडिया और मीडिया चैनलों के जरिए अपने पुराने साथियों और बॉलीवुड इंडस्ट्री से सहायता मांगी। पूजा की मदद के लिए जब कोई आगे नहीं आया तो एक बार फिर सलमान खान ने अपने बड़े दिल का परिचय दिया।
सलमान खान ने की मदद
एक वायरल वीडियो में जब लोगों ने पूजा की हालत देखी तो सलमान खान ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने न सिर्फ उनके इलाज का पूरा खर्च छह महीने तक उठाया, बल्कि उनके लिए रहन-सहन और इलाज की उचित व्यवस्था भी की। भले ही आज पूजा को लोग पहचान नहीं पाते, लेकिन उनकी डेब्यू फिल्म ‘वीरगति’ देख कर उन्हें याद किया जा सकता है। उनका संघर्ष, अकेलापन और फिर एक पुराने दोस्त का साथ, यह सब दर्शाता है कि कभी-कभी असल हीरो पर्दे पर नहीं, पर्दे के पीछे होते हैं।
