
सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) ने अपने करोड़ों ग्राहकों को एक बड़ी राहत दी है। बैंक ने बचत खाताधारकों (सेविंग अकाउंटहोल्डर्स) को उनके खाते में न्यूनतम औसत बैलेंस (मिनिमम एवरेज बैलेंस) न रखने पर लगने वाले दंडात्मक शुल्क को तत्काल प्रभाव से माफ करने की घोषणा की है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, यह फैसला ग्राहकों के बैंकिंग अनुभव को सरल और तनाव मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बैंक का उद्देश्य अपने ग्राहकों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ को कम करना है।
ग्राहकों के लिए वित्तीय समावेशन की पहल
बैंक ने जानकारी देते हुए बताया कि यह छूट उसकी कस्टमर सेंट्रिक और वित्तीय समावेशन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इंडियन ओवरसीज बैंक पहले ही कई विशेष योजनाओं जैसे IOB सिक्स्टी प्लस, IOB सेविंग्स बैंक पेंशनर, स्मॉल अकाउंट्स, और IOB सेविंग्स बैंक सैलरी पैकेज के लिए न्यूनतम बैलेंस शुल्क को हटा चुका है। इस अवसर पर, बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हम इस छूट की घोषणा करते हुए खुश हैं, जो हमारे खाताधारकों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान करेगी। हमारा लक्ष्य अपने ग्राहकों के लिए बैंकिंग को अधिक सुविधाजनक और बिना किसी परेशानी के बनाना है।
फैसले की अहम बातें
- क्या माफ़ हुआ: IOB के बचत खातों (पब्लिक स्कीम) में MAB न बनाए रखने पर लगने वाला दंडात्मक शुल्क।
- कब से लागू: यह छूट तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
- पिछला शुल्क: बैंक ने स्पष्ट किया है कि 30 सितंबर 2025 तक की अवधि के लिए जो शुल्क पहले से लागू था, वह मौजूदा नियमों के अनुसार ही लिया जाएगा।
- इंडियन ओवरसीज बैंक के इस कदम से उन आम खाताधारकों को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा, जिन्हें अनजाने में या किसी वित्तीय मजबूरी के कारण अपने खाते में न्यूनतम राशि बनाए न रख पाने पर शुल्क का भुगतान करना पड़ता था।