पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ (बाएं),अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (बीच में) और पाक आर्मी चीफ अ- India TV Hindi
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पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ (बाएं),अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (बीच में) और पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर (दाएं)

इस्लामाबाद: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर को पिछले दिनों ह्वाइट हाउस में जबरदस्त स्वागत किया था और उन दोनों को महान बताया था। ट्रंप को उम्मीद थी कि यह दोनों उनके काम आएंगे। अमेरिका से लौटने के बाद शहबाज और मुनीर ने ट्रंप को नोबेल पुरस्कार दिए जाने के लिए नामित भी किया और संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की ओर से प्रस्ताव भी दे दिया। मगर गाजा के मुद्दे पर एक बार ट्रंप को अपना समर्थन जताकर अगले ही दिन ऊनकी गाजा योजना को खारिज कर दिया। इससे ट्रंप को बड़ा झटका लगा है।

 

पाकिस्तान ने कैसे दिया ट्रंप को शॉक

पाकिस्तान ने ट्रंप द्वारा पेश गाजा शांति समझौते का पहले तो समर्थन किया, लेकिन बाद में इसे खारिज कर दिया। ट्रंप की योजना पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने एक्स एकाउंट पर सराहनीय प्रतिक्रिया देते हुए। इसे गाजा में संघर्ष समाप्त होने की दिशा में शानदार प्लान बताया था, मगर अब कुछ दिन बाद ही इस्लामाबाद ने वाशिंगटन की युद्ध समाप्ति के लिए प्रस्तावित ‘20-बिंदु’ वाली गाजा शांति योजना का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसाक डार ने अपने देश की संसद में कहा कि इस सप्ताह ट्रम्प द्वारा घोषित 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना उस मसौदे के अनुरूप नहीं है, जिसे मुस्लिम बहुल देशों के एक समूह ने वाशिंगटन में प्रस्तावित किया था।


डार ने कहा-ट्रंप ने योजना में किया बदलाव

पाकिस्तान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा ट्रंप की गाजा योजना की तारीफ किए जाने पर घिरी सरकार को डिफेंड करते हुए संसद में विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि शहबाज ने ट्रंप के प्लान को बिना पढ़े ट्वीट करके सराहना कर दी थी। मगर इससे किसी का नुकसान नहीं होना था। डार ने कहा कि जब प्लान का ब्यौरा सामने आया तो पाया गया कि यह पाकिस्तान की मंशा के अनुरूप नहीं है। इसलिए इसे खारिज किया जाता है। शुक्रवार को संसद में पाकिस्तानी सांसदों को संबोधित करते हुए डार ने कहा, “योजना में बदलाव किए गए हैं।” “मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि ये 20 बिंदु, जिन्हें ट्रम्प ने सार्वजनिक किया है, वे हमारे नहीं हैं। ये हमारे प्रस्ताव के समान नहीं हैं। मैं कहता हूं कि मसौदे में कुछ बदलाव किए गए हैं।”

 

ट्रंप की योजना की पहले पाकिस्तान ने की थी बड़ी प्रशंसा

इशाक डार का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान ट्रम्प की शांति योजना के लिए खुला समर्थन किया था। मगर पाकिस्तान में घरेलू स्तर पर इसका भारी विरोध हो गया। इसके बाद शहबाज सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। वाशिंगटन के प्रस्ताव में गाजा पर शासन करने वाले हमास को हथियार छोड़ने का निर्देश दिया गया है। योजना के अनुसार गाजा का संचालन एक “शांति बोर्ड” द्वारा किया जाएगा, जिसके अध्यक्ष खुद अमेरिकी राष्ट्रपति होंगे। यह योजना इजरायली सेना के चरणबद्ध तरीके से फिलिस्तीनी इलाके से वापसी, बंधकों का आदान-प्रदान, और गाजा के पुनर्निर्माण के प्रावधान भी करती है, जिसकी लागत अरब देशों द्वारा वहन की जाएगी। मगर समस्या यह है कि योजना में निकट भविष्य में फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का स्पष्ट रास्ता नहीं दिया गया है।


शरीफ और मुनीर ने कहा था-ट्रंप को 100 फीसदी समर्थन

ट्रंप ने पिछले सप्ताह अपनी योजना की घोषणा करते हुए दावा किया था कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर इसके “100 प्रतिशत” समर्थन में हैं। योजना के बाद, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसका स्वागत किया और दो-राष्ट्र समाधान को लागू करने की अपील की। शहबाज शरीफ ने रविवार रात X (पहले ट्विटर) पर कहा, “मैं इस बात से भी आश्वस्त हूं कि फिलिस्तीनी लोगों और इजरायल के बीच स्थायी शांति क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक विकास लाने में आवश्यक होगी।”

 

देश में होने लगा शहबाज और मुनरी का विरोध

पाकिस्तान सरकार का ट्रंप का समर्थन करने पर जब विरोध होने लगा तो उसे बैकफुट पर आना पड़ा। कराची आधारित समाचार पत्र डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी राजनेताओं, विश्लेषकों, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के ट्रम्प योजना समर्थन की आलोचना की और इसे “समर्पण” कहा। पाक के पूर्व राजनयिक और लेखक अब्दुल बसित ने डॉन से कहा,”यह मुस्लिम दुनिया का पूर्ण समर्पण है। वे फिलिस्तीनी राज्य का जिक्र भी नहीं कर सकते, जिसमें पूर्वी यरूशलेम उसकी राजधानी हो।” उन्होंने सवाल किया कि शहबाज शरीफ ट्रम्प की योजना का समर्थन क्यों कर रहे हैं, “जब उन्हें पूरी तरह पता है कि यह फिलिस्तीनी राज्य बनाने की किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज करता है।”

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