वंदे मातरम का मतलब- India TV Hindi
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वंदे मातरम का मतलब

भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 साल पूरे हो गए हैं। इस खास मौके पर देशभर में लोग देशभक्ती से भरे इस गीत को गुनगुना रहे हैं। स्कूल और कॉलेज खास कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। देश के अलग अलग हिस्सों में खास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस मौके पर पीएम मोदी स्मरणोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे जो पूरे साल चलेगा। 26 जनवरी हो या 15 अगस्त, वंदे मातरम गीत के बोल हर भारतवासी की जुबां पर रहते हैं। लेकिन बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिन्हें वंदे मातरम का मतलब नहीं पता है। आइये जानते हैं वंदे मातरम का क्या है मतलब और इस गीत से जड़ी अहम बातें क्या हैं?

वंदे मातरम का मतलब क्या है?

वंदे मातरम का मतलब है, ‘मैं मां को नमन करता हूं’ या भारत माता मैं तेरी स्तुति करता हूं। वंदे संस्कृत का शब्द है और इसका मतलब है नमन करना, मातरम- इंडो यूरोपीय शब्द है जिसका मतलब है मां। यानि मां को नमन करता हूं। इस गीत को भारत माता का गीत कहा जाता है और मातृभूमि के प्रति सम्मान जताने के लिए इसे गाया जाता है। जब वंदे मातरम गीत बजता है तो भारतवासी भारत माता का नमन करते हैं और देशभक्ति की भावना से भर जाते हैं।

वंदे मातरम गीत किसने लिखा है?

वंदे मातरम गीत को महान साहित्य रचनाकार और स्वतंत्रता सेनानी बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में इस गीत को लिखा था और 1896 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में वंदे मातरम को पहली बार गाया गया था। ये गीत अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन का प्रतीक बन गया था। आजादी की लड़ाई लड़ने वाले हर देशभक्त की जुबान पर ये गीत चढ़ गया, यही वजह है कि अंग्रेजों ने वंदे मातरम गीत पर बैन लगा दिया था। आजादी के बाद 24 जनवरी 1950 में वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के तौर पर चुना गया। 

कैसे हुई वंदे मातरम गीत की रचना?

इस गीत के लिखे जाने की पीछे की एक रोचक कहानी है। दरअसल अंग्रेजों ने इंग्लैंड की क्वीन के सम्मान वाले गीत- गॉड! सेव द क्वीन को हर कार्यक्रम में गाना अनिवार्य कर दिया था। जो बंकिम चंद्र समेत कई देशवासियों को पसंद नहीं था। बस यहीं से बंकिम चंद्र चटर्जी के अंदर भारत माता के लिए देशभक्ति का गीत लिखने की ललक जगी और उन्होंने 1874 में वंदे मातरम गीत की रचना की। इस गीत का भाव भारत भूमि को माता कहकर संबोधित करना है। 1882 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने उपन्यास आनंदमठ में भी इस गीत को शामिल किया गया था।

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