Shashi Tharoor- India TV Hindi
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शशि थरूर

कांग्रेस पार्टी ने लाल कृष्ण आडवाणी को लेकर शशि थरूर के बयान से खुद को अलग कर लिया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी की दिल खोलकर तारीफ की थी। हालांकि, पार्टी ने रविवार को उनके इस बयान से खुद को अलग कर लिया। पार्टी नेता पवन खेड़ा ने कहा कि थरूर के विचार निजी हैं और पार्टी का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। एक्स पर साझा की गई एक पोस्ट में कांग्रेस नेता ने लिखा, “हमेशा की तरह, डॉ. शशि थरूर अपनी बात कह रहे हैं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस उनके हालिया बयान से खुद को पूरी तरह अलग करती है। कांग्रेस सांसद और सीडब्ल्यूसी सदस्य के रूप में उनका ऐसा कहना कांग्रेस की विशिष्ट लोकतांत्रिक और उदारवादी भावना को दर्शाता है।”

कांग्रेस नेता खेड़ा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब थरूर ने 8 नवंबर को पूर्व उप प्रधानमंत्री को उनकी 98वीं जयंती पर शुभकामनाएं दी थीं, जिसमें उन्होंने “सार्वजनिक सेवा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता, विनम्रता और आधुनिक भारत की दिशा तय करने में उनकी भूमिका” की प्रशंसा की थी।

शशि थरूर ने क्या लिखा था?

थरूर ने एक्स पर लिखा, “आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी को उनके 98वें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं! जनसेवा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता, उनकी विनम्रता और शालीनता, तथा आधुनिक भारत की दिशा तय करने में उनकी भूमिका अमिट है। एक सच्चे राजनेता, जिनका सेवामय जीवन अनुकरणीय रहा है।” हालाँकि, थरूर की इस इच्छा पर कुछ आपत्तियां भी आईं, लोगों का कहना था कि कांग्रेस सांसद भाजपा नेता के असली इतिहास को छुपा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के एक वकील, संजय हेगड़े ने थरूर की आलोचना करते हुए कहा कि आडवाणी द्वारा “घृणा के बीज बोना” “जनसेवा” नहीं कहा जा सकता, उन्होंने 1990 में निकाली गई राम रथ यात्रा का हवाला दिया।

शशि थरूर ने क्या जवाब दिया

संजय हेगड़े की पोस्ट में लिखा था, “माफ कीजिए श्रीमान थरूर, इस देश में “घृणा के बीज” (कुशवंत सिंह के शब्दों में) फैलाना जनसेवा नहीं है।” इसके बाद कांग्रेस सांसद और अधिवक्ता हेगड़े के बीच चर्चा हुई, जिसमें थरूर ने भाजपा के संस्थापकों में से एक की विरासत का बचाव किया और पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू की विरासत की तुलना की। 

नेहरू और इंदिरा से की तुलना

थरूर ने एक्स पर लिखा, “सहमत हूं संजय, लेकिन उनकी लंबी सेवा को एक घटना तक सीमित करना, चाहे वह कितनी भी महत्वपूर्ण क्यों न हो अनुचित है। नेहरूजी के संपूर्ण करियर का आकलन चीन की विफलता से नहीं किया जा सकता, न ही इंदिरा गांधी के करियर का आकलन सिर्फ आपातकाल से किया जा सकता है। मेरा मानना ​​है कि हमें आडवाणी जी के प्रति भी यही शिष्टाचार दिखाना चाहिए।” (इनपुट- एएनआई)

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