महंगाई फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन हालिया बढ़त नीति निर्माताओं के लिए सतर्क रहने का संकेत है।- India TV Paisa

Photo:INDIA TV महंगाई फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन हालिया बढ़त नीति निर्माताओं के लिए सतर्क रहने का संकेत है।

घरेलू रसोई पर महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। सब्जियों और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल के कारण दिसंबर 2025 में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) बढ़कर 1.33 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह पिछले तीन महीनों का सबसे उच्चतम स्तर है। इससे पहले नवंबर में महंगाई दर इससे निचले स्तर पर थी। हालांकि, मौजूदा स्तर पर महंगाई दर अभी भी नियंत्रण में मानी जा रही है और यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के तय दायरे के भीतर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों, खासकर सब्जियों और अनाज के दामों की दिशा महंगाई की चाल तय करेगी। सरकार और रिजर्व बैंक दोनों ही महंगाई पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

महंगाई की चाल में उतार-चढ़ाव जारी

सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, महंगाई की चाल में उतार-चढ़ाव जारी है:

दिसंबर 2025: 1.33% (तीन महीने का उच्च स्तर)

नवंबर 2025: 0.71%

सितंबर 2025: 1.44% (पिछला उच्च स्तर)

हालांकि, राहत की बात यह है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खाद्य महंगाई लगातार सातवें महीने शून्य से नीचे (-2.71%) बनी हुई है। लेकिन नवंबर (-3.91%) की तुलना में इसमें बढ़त दर्ज की गई है, जो संकेत देता है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतें अब धीरे-धीरे बढ़ रही हैं।

इन वस्तुओं ने बिगाड़ा बजट

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुसार, दिसंबर 2025 के दौरान मुख्य महंगाई और खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी मुख्य रूप से पर्सनल केयर और प्रभाव, सब्जियां, मांस और मछली, अंडे, मसाले, दालें और इनके उत्पादों की कीमतों में इजाफे के कारण हुई है। गौरतलब है कि सरकार ने RBI को निर्देश दिया है कि वह महंगाई दर को 4 प्रतिशत के लक्ष्य पर बनाए रखे, जिसमें ऊपर-नीचे 2 प्रतिशत का मार्जिन निर्धारित है।

RBI के लक्ष्य और वर्तमान स्थिति

लगातार चौथे महीने खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की निचली सहनशील सीमा (2%) से नीचे बनी हुई है। केंद्र सरकार ने RBI को महंगाई दर 4% (±2%) के दायरे में रखने का लक्ष्य दिया है। मौजूदा आंकड़े दर्शाते हैं कि महंगाई फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन हालिया बढ़त नीति निर्माताओं के लिए सतर्क रहने का संकेत है।

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