शेख हसीना, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री। - India TV Hindi
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शेख हसीना, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री।

ढाकाः बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सनसनीखेज बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि बांग्लादेश इतिहास के सबसे खराब और रक्तरंजित अध्यायों से गुजर रहा है। उन्होंने अपने बयान की शुरुआत “बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम” के साथ की। हसीना ने कहा कि मेरे प्रिय देशवासियों, यह शेख हसीना बोल रही हैं। आज बांग्लादेश एक गहरी खाई के कगार पर खड़ा है। एक ऐसा राष्ट्र जो बुरी तरह आहत और रक्तरंजित है, अपने इतिहास की सबसे खतरनाक अध्यायों में से एक से गुजर रहा है।

राक्षसी हमलों से देश तबाह

हसीना ने कहा कि राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व में महान मुक्ति संग्राम के माध्यम से प्राप्त मातृभूमि अब उग्रवादी सांप्रदायिक ताकतों और विदेशी षड्यंत्रकारियों के राक्षसी हमले से तबाह हो चुकी है। हमारी कभी शांत और उपजाऊ भूमि अब एक घायल, खून से सनी परिदृश्य बन गई है। सच तो यह है कि पूरा देश अब एक विशाल जेल, एक नरसंहार का मैदान और मौत की घाटी बन चुका है। हर जगह केवल तबाही के बीच जीवित रहने की कोशिश कर रहे लोगों की करुण पुकार सुनाई देती है। जीवन के लिए व्याकुल विनती। राहत की दिल दहला देने वाली चीखें हैं। 

यूनुस है खूनी फासीवादी

हसीना ने आगे कहा कि खूनी फासीवादी यूनुस एक सूदखोर, मनी लॉन्ड्रर, लुटेरा और भ्रष्ट, सत्ता-लोलुप गद्दार है। उसने अपनी सर्वग्रासी नीतियों से हमारे राष्ट्र का खून चूस लिया है और मातृभूमि की आत्मा को कलंकित कर दिया है। 5 अगस्त 2024 को एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत, राष्ट्रीय दुश्मन, खूनी फासीवादी यूनुस और उसके राष्ट्र-विरोधी उग्रवादी साथियों ने जनता द्वारा सीधे चुनी गई प्रतिनिधि होने के बावजूद मुझे जबरन हटा दिया। उस दिन से राष्ट्र आतंक के युग में डूब गया है। क्रूर, अथक और घुटन भरा हो गया है। लोकतंत्र अब निर्वासित हो चुका है। 

धार्मिक अल्पसंख्यकों का लगातार हो रहा उत्पीड़न

पूर्व पीएम ने कहा कि देश में मानवाधिकारों को कुचल दिया गया है। प्रेस की स्वतंत्रता समाप्त कर दी गई है। महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा, यातना और यौन उत्पीड़न अब बेकाबू हो गया है। जीवन और संपत्ति की कोई सुरक्षा नहीं बची। धार्मिक अल्पसंख्यकों का लगातार उत्पीड़न हो रहा है। कानून-व्यवस्था पूरी तरह ढह चुकी है। राजधानी से लेकर सबसे दूरदराज गांवों तक भीड़ का आतंक, सामूहिक लूटपाट, सशस्त्र डकैती और वसूली का राज है। हमारे शिक्षा संस्थान अराजकता से ग्रस्त हैं और न्याय अब एक दुःस्वप्न बन गया है। उग्रवादी चरमपंथियों का उन्माद पूरे राष्ट्र पर भय का साया डाल रहा है। और भी खतरनाक बात यह है कि बांग्लादेश की भूमि और संसाधनों को विदेशी हितों को बेचने की गद्दार साजिश रची जा रही है। 

 

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