प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत वित्तीय समर्थन की आवश्यकता है।- India TV Paisa

Photo:FREEPIK AND X HANDLE प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत वित्तीय समर्थन की आवश्यकता है।

बजट 2026 के ऐलान में अब काफी कम समय रह गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य क्षेत्र को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से 1 फरवरी को आने वाले बजट में काफी उम्मीदें हैं। इस सेक्टर का मानना है कि सरकार इस सेक्टर के लिए इस साल बड़ा फंड जारी करने की घोषणा कर सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ उम्मीद जता रहे हैं कि इस बार स्वास्थ्य क्षेत्र को पर्याप्त बजट मिलेगा और उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए विशेष फंड सुनिश्चित किया जाएगा।

कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य खर्च बढ़ा था, लेकिन जैसे ही महामारी सामान्य हो गई, दूसरे विकासात्मक क्षेत्रों पर ध्यान बढ़ने के कारण यह घट गया। विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य खर्च को अब भी जीडीपी का 2.5% तक पहुंचाना प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए।

क्षेत्र को मजबूत करने की जरूरत

प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत वित्तीय समर्थन की आवश्यकता है, ताकि ये सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के तहत आवश्यक सेवाएं दे सकें और समुदाय स्तर पर निगरानी, रोकथाम और नियंत्रण का मजबूत आधार बन सकें। चाहे नेशनल हेल्थ मिशन का नाम या ढांचा बदल जाए, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को वित्तीय प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

जिला अस्पतालों को सुदृढ़ करना, डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के तहत टेली-हेल्थ और बिडायरेक्शनली कनेक्टेड रेफरल सिस्टम को बढ़ावा देना, और एआई आधारित मानव-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मानव संसाधन सुधारों पर ध्यान देना आवश्यक है।

स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बजट

बुजुर्गं की बढ़ती जनसंख्या, गैर-संचारी रोग, मानसिक स्वास्थ्य और विकलांगता जैसी चुनौतियों को देखते हुए, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में रोकथाम, शुरुआती पहचान, घर और सामुदायिक देखभाल और उचित रेफरल पर जोर देना चाहिए। इस काम के लिए ASHA और मल्टीपर्पज हेल्थ वर्करों की संख्या दोगुनी करना जरूरी है।

आयुष्मान योजना और वित्तीय सुरक्षा

यह भी मांग है कि आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना यानी PMJAY के तहत स्वास्थ्य सेवा कवरेज सभी वर्गों तक विस्तारित किया जाना चाहिए और अधिक प्रमाणित अस्पताल उपलब्ध कराए जाने चाहिए। स्वास्थ्य वित्त पोषण को ‘सिंगल पेयर’ प्रणाली की ओर बढ़ाया जाना चाहिए, जो कैपिटेशन आधारित भुगतान पर काम करे। केंद्रीय स्वास्थ्य सेवाओं और केंद्र शासित प्रदेशों में सुधारों के माध्यम से बजट इस प्रक्रिया को तेज कर सकता है।

दवा सुरक्षा और प्रयोगशालाएं

दवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन से लेकर विपणन तक कड़े नियामक उपाय जरूरी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक और निजी क्षेत्र, विश्वविद्यालय और शोध संस्थानों को जोड़कर प्रयोगशालाओं का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाना चाहिए।

पोषण, स्वच्छता और क्लाइमेट तैयारी

सरकार को पोषण, पानी, साफ-सफाई, स्वच्छ हवा और प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रमों के लिए बजट बढ़ाना चाहिए। आर्थिक सर्वे 2025-26 में सलाह दी गई है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और चीनी वाले मीठे पेय पर अधिक कर लगाया जाए। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हीट एडैप्टेशन प्लान बनाए और लागू किए जाएं, ताकि तेज़ गर्मी की लहरों और क्लाइमेट चेंज से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Latest Business News





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Exit mobile version