बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान- India TV Hindi
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बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान

Bangladesh Elections: बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने मतदान से पहले बड़ा बयान दिया है। रहमान ने कहा कि अगर उनकी पार्टी आगामी चुनाव में जीत हासिल कर सत्ता में आती है तो वो भारत के साथ मजबूत, सम्मानजनक और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद संबंध स्थापित करने की दिशा में सक्रिय प्रयास करेंगे। यह बयान उन्होंने ढाका में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया जो आम चुनाव से ठीक पहले की गई थी।

‘भारत के संबंध हमारी प्राथमिकता’

शफीकुर रहमान ने राष्ट्रीय एकता, सभी नागरिकों को समान अधिकार और पड़ोसी देशों खासकर भारत के साथ रचनात्मक एवं सकारात्मक संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हम अपने पड़ोसी देशों और विश्व भर के मित्र राष्ट्रों के साथ बेहतर और सकारात्मक रिश्ते विकसित करना चाहते हैं। भारत हमारा सबसे निकटतम पड़ोसी है और यह हमेशा हमारी प्राथमिकता रहेगा। हमारा मकसद किसी तरह का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि विकास, शांति और समृद्धि के लिए साझेदारी बनाना है। इसके लिए पारस्परिक सम्मान और विश्वास सबसे जरूरी हैं।”

‘सभी बांग्लादेशी नागरिक हैं’

अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं को लेकर उठ रही चिंताओं पर रहमान ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी किसी भी भेदभाव का समर्थन नहीं करती है। उन्होंने कहा, “चाहे किसी का धर्म कुछ भी हो, वो सभी बांग्लादेशी नागरिक हैं। मेरे देश में कोई दूसरी श्रेणी का नागरिक नहीं है। मैं किसी को अल्पसंख्यक नहीं मानता। हम सब बांग्लादेशी हैं और हर कोई प्रथम दर्जे का नागरिक है। हम बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक के आधार पर विभाजन को बिल्कुल स्वीकार नहीं करते।” 

‘हम सबसे पहले बांग्लादेशी हैं’

रहमान ने जोर देकर कहा कि देश की प्रगति असली समावेशन पर टिकी है। बिना समावेशन के हम एक राष्ट्र के रूप में आगे नहीं बढ़ सकते। समावेशन का मतलब लोगों को बांटना नहीं, बल्कि यह समझना है कि हम सब सबसे पहले बांग्लादेशी हैं। बांग्लादेश में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समूह हैं, जो कुल आबादी का करीब 8 प्रतिशत हैं। 

BNP से है जमात की टक्कर 

रहमान के इन बयानों को चुनाव पूर्व राजनीतिक माहौल में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संसदीय चुनाव बांग्लादेश के लिए खास महत्व रखता है क्योंकि यह 2024 के हिंसक छात्र आंदोलन के बाद पहला आम चुनाव है। इस आंदोलन की वजह से शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था। जमात-ए-इस्लामी 11 दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही है और यह बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के गठबंधन के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरी है। 

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