वैश्विक स्तर पर स्पॉट गोल्ड 22.07 डॉलर यानी 0.43 प्रतिशत गिरकर 5,062.46 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। - India TV Paisa

Photo:PIXABAY वैश्विक स्तर पर स्पॉट गोल्ड 22.07 डॉलर यानी 0.43 प्रतिशत गिरकर 5,062.46 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।

कमजोर वैश्विक संकेतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की कम होती उम्मीदों के कारण गुरुवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत में 400 रुपये की गिरावट आई। अब 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,60,900 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर सहित) पर पहुंच गया। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, बुधवार को सोना 1,61,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जहां से आज 0.25 प्रतिशत यानी 400 रुपये की कमी दर्ज की गई।

चांदी की कीमत में क्या हुआ बदलाव?

इधर, चांदी की कीमत स्थानीय बाजार में अपरिवर्तित रही और 2,68,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी हुई है (सभी कर सहित)। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटीज) सौमिल गांधी ने बताया कि अमेरिकी श्रम बाजार के मजबूत आंकड़ों ने फेड द्वारा आक्रामक दर कटौती की संभावनाओं को कम कर दिया है। इससे सोने में सीमित दायरे में हल्की गिरावट देखी गई। जनवरी के अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल डेटा में 1.3 लाख नई नौकरियां जुड़ीं, जबकि बेरोजगारी दर घटकर 4.3 प्रतिशत पर आ गई, जो मजबूत रोजगार बाजार का संकेत देता है। गांधी ने आगे कहा कि हालांकि निकट अवधि में दर कटौती की उम्मीदें कम हुई हैं, लेकिन लंबी अवधि में यह नीति जारी रहने की संभावना बनी हुई है। 

ग्लोबल मार्केट में स्पॉट गोल्ड

वैश्विक स्तर पर स्पॉट गोल्ड 22.07 डॉलर यानी 0.43 प्रतिशत गिरकर 5,062.46 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह 82.84 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। कोटक सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद स्पॉट गोल्ड 5,070 डॉलर प्रति औंस के आसपास कमजोर रहा। चांदी पहले 81.6 डॉलर तक लुढ़की, फिर उछलकर 83 डॉलर के करीब पहुंची। हाल के दिनों में चांदी में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है और यह 29 जनवरी के रिकॉर्ड उच्च स्तर से लगभग एक-तिहाई नीचे आ चुकी है। कम तरलता और आक्रामक पोजिशनिंग इसके मुख्य कारण हैं।

इन आंकड़ों पर टिकी नजर

ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि मौद्रिक ढील में देरी से सोने जैसे बिना ब्याज वाले एसेट्स की निकट अवधि में तेजी सीमित रह सकती है। फिर भी, भू-राजनीतिक जोखिम, केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी और मुद्रा अवमूल्यन की चिंताएं बुलियन को मजबूत समर्थन दे रही हैं। अब बाजार की नजर अमेरिकी बेरोजगारी दावों के आंकड़ों और शुक्रवार को जारी होने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक डेटा पर टिकी है, जो फेड की आगे की नीति दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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