अचानक धड़ाम हुआ...- India TV Paisa

Photo:CANVA अचानक धड़ाम हुआ भारतीय शेयर बाजार

भारतीय शेयर बाजार में एक दिन की राहत के बाद फिर से बड़ी गिरावट देखने को मिली। शुक्रवार को कारोबार के दौरान बाजार में जबरदस्त बिकवाली हुई और सेंसेक्स करीब 1100 अंकों तक लुढ़क गया। इस गिरावट से निवेशकों को भारी नुकसान हुआ और उनकी संपत्ति में लाखों करोड़ों की कमी आ गई। वहीं निफ्टी भी 24,500 के अहम स्तर के नीचे फिसल गया। विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक हालात, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार का माहौल कमजोर कर दिया है। आइए समझते हैं कि आखिर आज शेयर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई।

कारोबार के अंत में क्या रहा बाजार का हाल

दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1,017.37 अंक यानी 1.27 फीसदी की गिरावट के साथ 78,998.53 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 315.45 अंक यानी 1.27 फीसदी टूटकर 24,450.45 पर आ गया। ज्यादातर सेक्टर के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। हालांकि आईटी, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के कुछ शेयरों में हल्की बढ़त देखने को मिली।

1. पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव

शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। निवेशकों को डर है कि अगर इस क्षेत्र में हालात बिगड़े तो ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

2. कमजोर ग्लोबल संकेतों का असर

दुनियाभर के बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों ने भी भारतीय बाजार को दबाव में डाल दिया। एशियाई बाजारों में भी गिरावट का माहौल रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा गिरा, जबकि अमेरिका के शेयर बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए थे। इसका असर भारतीय निवेशकों की धारणा पर भी पड़ा।

3. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) पिछले कुछ दिनों से लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। गुरुवार को उन्होंने करीब 3,752 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं मार्च महीने में अब तक एफआईआई लगभग 16,000 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। इससे बाजार पर दबाव बढ़ गया है।

4. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 5 फीसदी बढ़कर 86 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई, जो पिछले 20 महीनों का उच्च स्तर है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने और अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

Latest Business News





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Exit mobile version