
अमित शाह
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने विपक्ष को खूब सुनाया। उनके निशाने पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी रहे। सदन के अंदर राहुल गांधी के व्यवहार से लेकर नियमों को न मानने का आरोप लगाने के साथ ही सदन में उनकी अटेंडेंस का ब्यौरा भी पेश कर दिया। इसी दौरान विपक्ष की ओर से जब हंगामा किया जाना लगा तो अमित शाह ने तेज आवाज में कहा-सुनो, अब सुनना पड़ेगा।
कौन तय करेगा कि किसे बोलना है?
अमित शाह ने कहा, “विपक्ष के नेता की शिकायत है कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है, विपक्ष के नेता की आवाज़ दबाई जा रही है। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि कौन तय करेगा कि आपकी पार्टी से किसे बोलना है? स्पीकर? नहीं, यह आपको तय करना है। लेकिन जब बोलने का मौका आता है, तो आप जर्मनी में, इंग्लैंड में दिखते हैं। फिर वह शिकायत करते हैं। 18वीं लोकसभा में कांग्रेस सांसद 157 घंटे और 55 मिनट बोले। विपक्ष के नेता ने कितना बोला? आपने क्यों नहीं बोला? किस स्पीकर ने आपको रोका? कोई नहीं रोक सकता। लोकसभा को बदनाम करने के लिए यह किया जा रहा है।”
सुनो, अब सुनना पड़ेगा
अमित शाह ने कहा कि 16 वीं लोकसभा में 2014, 2015, 2017, 2018 में राष्ट्रपति के धन्यवाद प्रस्ताव पर एक भी चर्चा में इन्होंने हिस्सा नहीं लिया। जब विपक्षी सांसदों ने विरोध किया तो अमित शाह ने गुस्से में कहा कि सुनो, अब सुनना पड़ेगा। इसके बाद अमित शाह ने आगे का भी ब्यौरा पेश किया और कहा कि ये बोलते हैं कि हमें बोलने नहीं दिया जाता।
बजट सत्र या कोई विशेष सत्र के दौरान विदेश यात्रा
अमित शाह ने कहा, “शीतकालीन सत्र 2025 में वह(राहुल गांधी) जर्मनी, बजट सत्र 2025 में वे वियतनाम की यात्रा पर थे, बजट सत्र 2023 में इंग्लैंड की यात्रा पर थे। बजट सत्र 2018 में सिंगापुर और मलेशिया की यात्रा पर थे और मॉनसून सत्र 2020 में विदेश यात्रा पर थे, बजट सत्र 2015 में वे विदेश यात्रा पर रहे। इसमें एक भयंकर संयोग है कि जब भी बजट सत्र या कोई विशेष सत्र आता है तो वे विदेश यात्रा पर होते हैं और फिर कहते हैं कि हमें बोलने नहीं देते। विदेश से आप सदन में कैसे बोलेंगे? जो व्यक्ति जर्मनी, इंग्लैंड, सिंगापुर में है वह यहां कैसे बोलेगा? यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का प्रावधान नहीं है।”
विषय से हटकर बात करेंगे तो टोकना पड़ेगा
अमित शाह ने कहा, “कल के.सी. वेणुगोपाल ने मुद्दा उठाया कि 38-40 बार विपक्ष के नेता को रोका, टोका गया। स्पीकर द्वारा एक बार टोकने के बाद दूसरी बार आप वही बात करेंगे तो स्पीकर के पास क्या विकल्प बचा। जब राजनाथ सिंह ने कह दिया कि आप अप्रकाशित पुस्तक या पत्रिका का उद्धरण नहीं कर सकते। इसका उद्धरण करके लोकसभा में किसी को बोलने का अधिकार नहीं है। लेकिन अगर आप उसी विषय पर बोलेंगे तो आपको टोकना पड़ेगा।”
हमने विपक्ष की आवाज नहीं दबाई
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि हमने कभी विपक्ष की आवाज़ दबाने का काम नहीं किया… विपक्ष की आवाज़ दबाने का काम 1975 में हुआ था जब समूचे विपक्ष को जेल में बंद कर दिया गया था। उसे विपक्ष की आवाज़ दबाना कहते हैं।”
बीजेपी की छवि को खंडित करने का प्रयास
अमित शाह ने कहा, “पूरे देश में बीजेपी की छवि खंडित करने के लिए प्रचार किया जा रहा है कि उन्हें(विपक्ष) बोलने नहीं दिया जाता लेकिन जो लोग यह प्रयास कर रहे हैं उनसे मैं कहना चाहता हूं कि इससे भाजपा की छवि खंडित नहीं होती क्योंकि कौन बोलेगा, कब बोलेगा, कितना बोलेगा और क्या बोलेगा वह निर्णय सत्ताधारी पार्टी नहीं स्पीकर करते हैं।”
जो नियमों को नहीं मानेगा उसका माइक बंद होना चाहिए
अमित शाह ने कहा, “कुछ सदस्यों ने कहा कि यह(अविश्वास प्रस्ताव) माइक के कारण आया है, माइक बंद होता है। अभी गिरिराज सिंह भी खड़े होकर पप्पू यादव के खिलाफ बोल रहे थे तो उनका माइक बंद कर दिया गया। मंत्री होने के बावजूद भी माइक बंद होता है। यह सदन नियमों से चलता है, जो नियमों, अनुशासन से नहीं चलेगा उसका माइक बंद होगा और बंद हो ही जाना चाहिए।”
