IND vs BAN- India TV Hindi
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भारत बनाम बांग्लादेश

टी20 वर्ल्ड कप 2016 में सुपर-10 राउंड में भारत और बांग्लादेश के बीच एक रोमांचक मैच खेला गया था। इस मुकाबले में बांग्लादेशी टीम को आखिरी ओवर में 1 रन से हार का सामना करना पड़ा था। उस हार को लेकर अब 10 साल के बाद बांग्लादेश के पूर्व क्रिकेटर महमूदुल्लाह ने बड़ा खुलासा किया है। इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा करने के ठीक एक साल बाद, महमुदुल्लाह ने बताया है कि उस हार का दर्द उन्हें अब भी सता रहा है और उन्होंने अपने क्रिकेट करियर का सबसे बड़ा सबक उसी मैच से सीखा है।

वह बेहद दिल तोड़ने वाला हार था- महमूदुल्लाह

भारत के खिलाफ उस मैच में महमूदुल्लाह और रहीम बांग्लादेश को जीत के करीब लेकर चले गए थे, लेकिन वे मैच खत्म नहीं कर पाए। महमूदुल्लाह ने ‘सिंपली सईद’ नाम के एक पॉडकास्ट में कहा कि मुझे नहीं पता कि भारत के खिलाफ उस मैच में क्या हुआ था। वह बहुत दुखद था। वह दिल तोड़ने वाला था। मुझे लगता है कि वह बेहद दिल तोड़ने वाला था। हम मैदान पर रोए। जब ​​हम होटल लौटे, तब भी हम रोए। मैं, मुशफिकुर रहीम, हम सब रोए। टीम के कई और सदस्य भी रो रहे थे, क्योंकि हम टीम इंडिया को हराने के बहुत करीब पहुंच गए थे।

बाउंड्री लगाने की कोशिश करना सबसे बड़ी गलती थी

उन्होंने आगे कहा कि लेकिन निजी तौर पर, मेरी जिंदगी में वह मेरे लिए एक बहुत बड़ा सबक था। आपको मैच को आखिरी गेंद तक ले जाना होता है और फिर उसे खत्म करना होता है। उस खास पल में मैं सोच रहा था कि अगर हम बस एक बाउंड्री लगा दें, तो हम जीत जाएंगे। सच कहूं तो, वह बहुत बड़ी बेवकूफी थी। बता दें कि उस मुकाबले में बांग्लादेश को जीत के लिए तीन गेंदों में 2 रन की जरूरत थी, लेकिन अंत में उन्हें एक रन से हार का सामना करना पड़ा।

चौथे या पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करना चाहते थे महमूदुल्लाह

इस पॉडकास्ट के दौरान महमूदुल्लाह ने ये भी बताया कि वह हमेशा चौथे या पांचवें नंबर पर बैटिंग करना चाहते थे, लेकिन उनकी बैटिंग की जगह अक्सर बदल दी जाती थी। उन्होंने कहा कि ज्यादातर मौकों पर उन्हें ही अपनी बैटिंग पोजीशन का बलिदान देना पड़ता था। महमूदुल्लाह ने बताया कि मैं चौथे या पांचवें नंबर पर बैटिंग करना चाहता था। लेकिन मैंने कभी इस बारे में आवाज नहीं उठाई। मैं चुप रहा।

पूर्व क्रिकेटर ने आगे कहा कि बांग्लादेश टीम के लिए बैटिंग पोजीशन के मामले में मैंने जितने बलिदान दिए हैं, मुझे नहीं लगता कि किसी और ने ऐसा किया होगा। मेरी अपनी पसंद तो थी, लेकिन मुझे बलिदान देना पड़ा। मुझे किसी बात की कोई शिकायत नहीं है। मुझे खुशी थी कि टीम जैसा चाहती थी मैं उस हिसाब से काम कर पाया और अगर टीम ने अच्छे नतीजे दिए और अच्छा प्रदर्शन किया, तो सब ठीक था। मैंने कोई शिकायत नहीं की।

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