भारतीय टेलीविजन के इतिहास में रामानंद सागर की ‘रामायण’ एक ऐसा अध्याय है, जिसने न केवल करोड़ों लोगों की आस्था को छुआ, बल्कि सड़कों पर सन्नाटा पसार देने वाली लोकप्रियता भी हासिल की। इस धारावाहिक ने अरुण गोविल और दीपिका चिखलिया जैसे कलाकारों को भगवान का दर्जा दिला दिया, लेकिन इसी शो की सफलता के पीछे एक ऐसा गुमनाम नायक भी था, जिसने पर्दे पर एक-दो नहीं बल्कि 11 अलग-अलग किरदार निभाए, पर फिर भी वह शोहरत हासिल नहीं कर सका जिसका वह हकदार था।

रामायण के मल्टी-टैलेंटेड कलाकार

हम बात कर रहे हैं अभिनेता असलम खान की। एक मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाले असलम ने इस पौराणिक गाथा में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने समुद्र देव से लेकर ऋषि-मुनियों और कई अन्य सहायक भूमिकाओं को इतनी शिद्दत से निभाया कि दर्शक दंग रह गए। दिलचस्प बात यह है कि असलम कभी अभिनेता बनना ही नहीं चाहते थे, वे तो निजी क्षेत्र में नौकरी की तलाश में थे। अभिनय की दुनिया में उनका प्रवेश महज एक इत्तेफाक था, जिसकी शुरुआत ‘विक्रम और बेताल’ से हुई थी।

संयोग से मिली ‘रामायण’ में एंट्री

रामायण में असलम खान की एंट्री की कहानी भी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। दरअसल समुद्र देव के किरदार के लिए तय अभिनेता ने ऐन वक्त पर काम करने से मना कर दिया था। विकल्प के तौर पर असलम को बुलाया गया। उनकी कड़क आवाज और संवाद अदायगी ने रामानंद सागर को इतना प्रभावित किया कि उन्हें एक के बाद एक कई रोल मिलते चले गए। इसके बाद उन्होंने ‘अलिफ लैला’, ‘श्री कृष्णा’ और ‘सूर्यपुत्र कर्ण’ जैसे लोकप्रिय शोज में भी काम किया।

ग्लैमर की दुनिया को अलविदा और नई शुरुआत

इतने बड़े और सफल प्रोजेक्ट्स का हिस्सा होने के बावजूद असलम खान को वह स्थायी पहचान और काम नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी। इंडस्ट्री की बेरुखी और सीमित अवसरों से तंग आकर उन्होंने साल 2002 में अभिनय को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। चकाचौंध से दूर असलम अब उत्तर प्रदेश के झांसी में एक शांत जीवन बिता रहे हैं और एक मार्केटिंग फर्म में काम करते हैं। 2020 के लॉकडाउन के दौरान जब रामायण का दोबारा प्रसारण हुआ, तब सोशल मीडिया पर दर्शकों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। 

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