रामानंद सागर की ‘रामायण’ के अलावा बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ का हर किरदार आज भी लोगों के बीच चर्चा में है, जिन्हें 38 साल बाद भी कोई भूल नहीं पाया है। इसमें से एक रोल धृतराष्ट्र का भी है, जिसे एक्टर गिरिजा शंकर ने निभाया था। इस सीरियल ने उनकी किस्मत के तारें चमका दिए और वह इसके कई शोज में नजर आए। अपने पहले ही सीरियल से उन्होंने दर्शकों के मन में ऐसी जगह बनाई कि उनका ये किरदार टीवी के इतिहास में अमर हो गया। गिरिजा शंकर अब भारत में नहीं रहते हैं और हिंदी सिनेमा से भी दूरी बना ली है।
28 की उम्र में धृतराष्ट्र बन कमाया नाम
गिरिजा शंकर एक एक्टर, निर्देशक और निर्माता हैं, जिन्हें 1988 के ‘महाभारत’ में धृतराष्ट्र की भूमिका के लिए सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। उन्होंने हिंदी और रीजनल सिनेमा में काम किया है, जिसमें ‘नाइट ऑफ हेन्ना’ और ‘आग से खेलेंगे’ जैसी फिल्में शामिल हैं। उन्हें ‘बाघी’ और ‘ख्वाब’ जैसे सीरियलों में अपनी भूमिकाओं के लिए भी पहचाना जाता है। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि जब इस एक्टर ने कौरवों के नेत्रहीन पिता का किरदार निभाया था और सफेद दाढ़ी रखी थी तब उनकी उम्र सिर्फ 28 साल थी। गिरिजा शंकर ने हिंदुस्तान टाइम्स में खुलासा किया था कि इतनी कम उम्र में स्क्रीन पर एक बुजुर्ग का किरदार निभाने को लेकर वे शुरू में थोड़े हिचकिचा रहे थे, लेकिन जब उन्होंने इस किरदार के बारे में पढ़ा तो उन्हें इसकी अहमियत समझ में आ गई।
धृतराष्ट्र का किरदार निभाना था सबसे मुश्किल
गिरिजा शंकर अब 66 साल के हो चुके हैं और लॉस एंजिल्स में बस गए हैं, लेकिन काम के सिलसिले में भारत आते-जाते रहते हैं। वे आज भी पंजाबी फिल्मों से जुड़े हुए हैं। इस इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि ‘महाभारत’ में धृतराष्ट्र का किरदार निभाने उनके लिए कितना मुश्किल रहा। एक्टर गिरिजा ने कहा, ‘चुनौतियां बहुत थीं… शायद किसी भी दूसरे किरदार की तुलना में कहीं ज्यादा। यह एकमात्र ऐसा पात्र था जिसके अंदर अंत तक, लगातार एक आंतरिक द्वंद्व चलता रहा। उसके सामने इतनी अधिक चुनौतियां होने का कारण यह था कि वह नेत्रहीन था और उसे उस सिंहासन से वंचित कर दिया गया था जिस पर उसका पूर्ण अधिकार था। वह सदैव इस दुविधा में रहता था कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं।’
गिरिजा शंकर को कैसे मिला धृतराष्ट्र का रोल
एक्टर ने बताया, ‘महाभारत से पहले मैंने चोपड़ा परिवार की एक फिल्म आज की आवाज में काम किया था, जिसमें राज बब्बर और स्मिता पाटिल मुख्य भूमिका में थे। उससे पहले मैं थिएटर कर रहा था और चोपड़ा साहब अपने परिवार के साथ मुंबई के पृथ्वी थिएटर में हमारा नाटक देखने आया करते थे। उन्हें मेरा एक नाटक बहुत पसंद आया था और उन्हें मैं अपने किरदार के रूप में याद रह गया था। इसलिए, जब वह आज की आवाज बना रहे थे तो उन्होंने खास तौर पर मुझे एक छोटा, लेकिन अच्छा रोल निभाने के लिए बुलाया। उन्होंने मुझे ‘बहादुर शाह जफर’ में भी एक अच्छा रोल दिया था, जिसे उन्होंने महाभारत से पहले बनाया था।’
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