छिंदवाड़ा के इस गांव में नहीं पड़ा एक भी वोट- India TV Hindi

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छिंदवाड़ा के इस गांव में नहीं पड़ा एक भी वोट

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों के लिए होने वाला मतदान संपन्न हो गया है। प्रदेश में शाम 5 बजे तक 71.16% मतदान हुआ है। और अब 3 दिसंबर को मतगणना के बाद यह मालूम हो जाएगा कि प्रदेश में गली सरकार कौन बनाएगा। कई विधानसभा क्षेत्रों में 80 प्रतिशत से भी ज्यादा मतदान हुआ तो कई जगहों पर यह 50 प्रतिशत तक ही रह गया। इसी बीच एक गांव ऐसा भी रहा, जहां ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया।

शाहपुरा गांव में मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार कर दिया

समाचार रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गृह जिला छिंदवाड़ा के शाहपुरा गांव में मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार कर दिया। चुनाव बहिष्कार की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम गांव में पहुंची थी। उन्होंने ग्रामीणों को मतदान करने के लिए प्रेरित किया, लेकिन कोई भी ग्रामीण मानने को तैयार नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि ग्रामीण उसी गांव के रहने वाले बंटी पटेल के कांग्रेस पार्टी से चौरई विधानसभा सीट से टिकट ना मिलने से नाराज थे और इसी वजह से ग्रामीणों ने यह फैसला किया। हालांकि बंदी पटेल चौरई सीट से ही निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

 यहां से हमेशा कांग्रेस का उम्मीदवार ही बढ़त बनाता रहा है

माना जाता है कि यह गांव कांग्रेस का गढ़ है और यहां से हमेशा कांग्रेस का उम्मीदवार ही बढ़त बनाता रहा है। इसके साथ ही यहां मतदान का रिकॉर्ड भी बेहतरीन रहता है। 2018 के विधानसभा चुनावों के दौरान यहां पर मतदान प्रतिशत 99% था। लेकिन इस बार यहां पर एक भी वोट नहीं डाली गया है, जिसके बाद कहा जा रहा है कि यहां कांग्रेस को नुकसान झेलना पड़ सकता है। वहीं इस प्रकरण के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कमलनाथ पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि इस घटना से साफ़ हो गया है कि जनता इनसे परेशान हो चुकी है और अब इनसे मुक्ति पाना चाहती है।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कसा तंज

उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा जिले में एक शाहपुरा गांव है, जहां बीजेपी को शून्य वोट मिलते थे। अब उस गांव ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया है। यह वंशवाद की राजनीति के खिलाफ बगावत है। छिंदवाड़ा वंशवाद की राजनीति से दुखी है और अब बदलाव का मन बना लिया है। मैं बार-बार कहता था कि कमल नाथ चुनाव हारेंगे। मुझे तब नहीं पता था कि उस गांव में लोग चुनाव का बहिष्कार करेंगे। बगावत का इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं हो सकता कि पूर्व सीएम के निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव में एक भी वोट नहीं डाला गया।





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