बंदूक लेकर स्कूल में घुसे आतंकी।- India TV Hindi
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बंदूक लेकर स्कूल में घुसे आतंकी।

इस वक्त की बड़ी खबर दक्षिण अफ्रीकी देश नाइजीरिया से सामने आ रही है। यहां बंदूकधारियों ने शुक्रवार सुबह पश्चिमी प्रांत में स्थित एक कैथोलिक स्कूल पर हमला कर दिया। बंदूकधारियों ने स्कूल के अंदर करीब 215 विद्यार्थियों के साथ-साथ 12 शिक्षकों को बंधक बना लिया है। अधिकारियों ने इस घटना के बारे में जानकारी दी। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब कुछ दिन पहले ही पड़ोसी राज्य में बंदूकधारियों ने 25 छात्राओं को अगवा कर लिया था। 

सेंट मैरी स्कूल पर हमला

वहीं इस घटना को लेकर राज्य सरकार में सचिव अबुबकर उस्मान ने बताया कि यह हमला और अपहरण सेंट मैरी स्कूल में हुआ, जो अगवारा में स्थित है। हालांकि, उन्होंने बंधक बनाए गए विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की। स्थानीय टीवी चैनल ‘अराइज टीवी’ की खबर के मुताबिक, 215 विद्यार्थियों को बंधक बना लिया गया है। इस घटना की किसी भी समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली है।

सुरक्षा बलों को किया गया तैनात

नाइजर राज्य पुलिस कमान ने कहा कि अपहरण तड़के हुए और तब से समुदाय में सैन्य और सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है। इसमें सेंट मैरी को एक माध्यमिक विद्यालय बताया गया है, जो नाइजीरिया में 12 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा प्रदान करता है। सेटेलाइट से ली गई तस्वीरों से पता चला है कि स्कूल परिसर एक निकटवर्ती प्राथमिक विद्यालय से जुड़ा हुआ है, जिसमें 50 से ज़्यादा कक्षाएं और छात्रावास हैं।

पीड़ित ने क्या कहा

62 वर्षीय दाउदा चेकुला ने बताया कि अपहृत स्कूली बच्चों में उनके चार पोते-पोतियां भी शामिल हैं, जिनकी उम्र 7 से 10 साल के बीच है। चेकुला ने कहा, “हमें नहीं पता कि अभी क्या हो रहा है, क्योंकि आज सुबह से हमें कुछ भी सुनाई नहीं दिया है। जो बच्चे बचकर भाग पाए थे, वे तितर-बितर हो गए हैं, उनमें से कुछ अपने घरों को वापस भाग गए हैं और हमें बस यही जानकारी मिल रही है कि हमलावर अभी भी बाकी बच्चों को लेकर जा रहे हैं।”

राज्य सरकार ने जारी किया बयान

नाइजर राज्य सरकार के सचिव के बयान में कहा गया है कि बढ़ते खतरों की पूर्व खुफिया चेतावनी के बावजूद अपहरण हुआ है। इसमें लिखा था, “दुर्भाग्यवश, सेंट मैरी स्कूल ने राज्य सरकार को सूचित किए बिना या उसकी मंज़ूरी लिए बिना ही शैक्षणिक गतिविधियां पुनः शुरू कर दीं, जिससे विद्यार्थियों और कर्मचारियों को अपरिहार्य जोखिम का सामना करना पड़ा।” (इनपुट- पीटीआई)

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