• यूपी की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के तट पर मौजूद कूड़े के बड़े ढेर वाला मैदान अब 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' के रूप में हरे-भरे स्मारक परिसर में तब्दील हो गया। उम्मीद है कि ये नवाबों की नगरी में आकर्षण का नया केंद्र बनेगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के मौके पर लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण किया। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। इस फोटो गैलरी में देखिए राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल की खासियत।

    Image Source : @narendramodi/x

    यूपी की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के तट पर मौजूद कूड़े के बड़े ढेर वाला मैदान अब ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ के रूप में हरे-भरे स्मारक परिसर में तब्दील हो गया। उम्मीद है कि ये नवाबों की नगरी में आकर्षण का नया केंद्र बनेगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के मौके पर लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण किया। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। इस फोटो गैलरी में देखिए राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल की खासियत।

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    जान लें कि लखनऊ विकास प्राधिकरण की तरफ से करीब 230 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया राष्ट्र प्रेरणा स्थल दुबग्गा के बसंत कुंज योजना क्षेत्र में गोमती नदी के तट पर 65 एकड़ में फैला है। एलडीए के अधिकारियों के मुताबिक, इस जगह पर पहले करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन कचरा पड़ा हुआ था। जिसको प्रेरणा स्थल का निर्माण करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्कृत करके साफ किया गया। पारिस्थितिकी बहाली के तौर पर पूरे इलाके में मियावाकी तकनीक का इस्तेमाल करके करीब 50 हजार पेड़ लगाए गए। इससे कभी कूड़े के बड़े-बड़े ढेरों से भरी जगह को सांस्कृतिक गतिविधियों, चिंतन और सार्वजनिक उपयोग के लिए हरे इलाके में तब्दील कर दिया गया।

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    लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, राष्ट्र प्रेरणा स्थल का परिसर जनता के लिए सोमवार से खोल दिया जाएगा। राष्ट्र प्रेरणा स्थल में एंट्री के लिए टिकट भी लगेगा। राष्ट्र प्रेरणा स्थल परिसर के केंद्र में BJP के विचारक श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 65-65 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमाएं लगी हैं। लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने वाली ये बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं इस क्षेत्र को उन नेताओं को समर्पित स्मारक के तौर पर चिह्नित करती हैं जिनके विचारों ने आधुनिक भारतीय राजनीतिक सोच को आकार दिया।

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    राष्ट्र प्रेरणा स्थल में 6 हजार 300 स्क्वायर मीटर में फैला संग्रहालय भी है, जिसे डिजिटल और इमर्सिव फॉर्मेट के जरिए तीनों नेताओं की जिंदगी, संघर्षों और दर्शन के बारे में बताने के लिए डिजाइन किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस संग्रहालय में श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सार्वजनिक जिंदगी के अहम क्षणों को दर्शाने के लिए डिस्प्ले का उपयोग भी किया गया है।

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    इस संग्रहालय के एक भाग में अटल बिहारी वाजपेयी के पीएम के तौर पर कार्यकाल को दर्शाया गया है। इसमें पोखरण न्यूक्लियर टेस्ट और उसके बाद लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के घटनाक्रम के अलावा सर्व शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं का प्रदर्शन है। साल 1975 के आपातकाल और ‘नए भारत’ के उदय से जुड़े महत्वपूर्ण पड़ावों को भी प्रदर्शित किया गया है। अधिकारियों ने कहा किसंग्रहालय में अटल बिहारी वाजपेयी की कविता, दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय और एकात्म मानववाद के दर्शन, और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जम्मू -कश्मीर से जुड़े सियासी आंदोलन और सत्याग्रह से संबंधित चीजें भी हैं।

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    इसकी तारीफ पीएम मोदी ने भी की। पीएम मोदी ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल के उद्घाटन को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल में कमल पुष्प के आकार का अत्याधुनिक संग्रहालय निस्वार्थ नेतृत्व और सुशासन की भावना को सजीव रूप में सामने लाता है। यह आने वाली पीढ़ियों को हमारे जननायकों के आदर्शों को आत्मसात कर जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता रहेगा।’

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    संग्रहालय के साथ ही राष्ट्र प्रेरणा स्थल को विशाल सार्वजनिक स्थल के रूप में भी तैयार किया गया है, जहां सांस्कृतिक और अन्य कार्यक्रम होंगे। इसमें करीब 3 हजार लोगों के बैठने की क्षमता वाला शानदार एम्फीथिएटर, ओपन-एयर थिएटर, रैली स्थल, मेडिटेशन रूम और एक लाइब्रेरी शामिल है।

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    राष्ट्र प्रेरणा स्थल में बगीचे, पार्किंग क्षेत्र, कैफेटेरिया, झंडा फहराने की जगह और 3 हेलीपैड भी हैं। गोमती नदी के किनारे शांत माहौल के तौर पर डिजाइन किए गए राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्देश्य इतिहास, विचारधारा और पर्यावरण का संगम है। लखनऊ के लोग भी इस नई ऐतिहासिक जगह को लेकर बेहद उत्साहित हैं क्योंकि यह एक ऐसी जगह बना है जहां पहले कभी कूड़े के बड़े-बड़े ढेर थे।





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