Gorakhpur- India TV Hindi
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गोरखपुर के पिपराइच रेलवे स्टेशन पर लगा हरा गुंबद हटाया गया

गोरखपुर: यूपी के गोरखपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के पिपराइच रेलवे स्टेशन पर सजावट के लिए एक हरा गुंबद लगाया गया था लेकिन लोगों ने उसके नीचे नमाज पढ़ना शुरू कर दिया। जब ये मामला सामने आया तो रेलवे प्रशासन ने इस पर कार्रवाई की और देर रात हरे रंग के गुंबद को हटा दिया गया और छत पर किनारे रख दिया। अब रेलवे प्रशासन यहां दूसरे रंग का गुंबद लगाएगा।

क्या है पूरा मामला?

पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल के पिपराइच रेलवे स्टेशन के नवनिर्मित भवन पर अब हरा गुंबद नजर नहीं आ रहा। पूर्व सभासद सुभाष चंद की शिकायत पर रेलवे प्रशासन ने इस मामले को संज्ञान में लिया था। देर रात हरे रंग के गुंबद को हटाकर छत पर किनारे रख दिया गया है।

अब यहां दूसरे रंग के एस्बेस्टस शीट से गुंबद बनाया जाएगा। रेलवे प्रशासन ने इस संबंध में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। हालांकि यह गलती किसके स्तर पर हुई, इसकी जांच कराई जा रही है। पिपराइच रेलवे स्टेशन के नवनिर्मित भवन में गुंबद लगने के बाद प्रथम दृष्टया रेलवे स्टेशन एक मस्जिद की आकृति जैसा नजर आ रहा था। इसपर हरे रंग का गुंबद बना दिया गया था।

पिपराइच नगर पंचायत के पूर्व सभासद सुभाष चंद ने इसको लेकर महाप्रबंधक से शिकायत की थी। उनका आरोप था कि ऊपर हरे रंग का गुंबद होने के कारण मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने उसके नीचे नमाज भी पढ़नी शुरू कर दी थी ।


गोरखपुर कैंट रेलवे स्टेशन से पनियहवा तक रेल लाइन दोहरीकरण का काम हो रहा है। दोहरीकरण के कारण कई स्टेशनों पर प्लेटफार्म व भवन भी टूट रहे हैं। उनकी जगह नया भवन बनाया जा रहा है। इसी क्रम में पिपराइच रेलवे स्टेशन का भवन टूटा और उसकी जगह नया भवन बनाया गया।

बीच में गुंबदनुमा आकृति बनानी थी। ठेकेदार की ओर से वहां हरे रंग की एस्बेस्टेस शीट लगा दी गई। यह शीट बिल्कुल वैसी नजर आ रही थी, जैसी मजार या मस्जिद पर रहती है। इसी के बाद विवाद शुरू हो गया। पूर्व सभासद ने बताया कि रेल लाइन दोहरीकरण के कारण पिपराइच के पुराने स्टेशन भवन को ध्वस्त कर नया भवन बनाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि ठेकेदार ने रेलवे अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर मस्जिद ढांचे जैसा हरे रंग का गुंबद बना दिया है। लेकिन जैसे ही खबर मीडिया में आई, रेलवे प्रशासन ने इसको फौरन रात में ही उखड़वा कर हटवा दिया। (इनपुट: गोरखपुर से राज श्रीवास्तव)





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