अयातुल्ला अली खामेनेई- India TV Hindi
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अयातुल्ला अली खामेनेई

America-Iran Tensions: अमेरिका और ईरान में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। तनाव के बीच इस तरह की रिपोर्ट भी सामने आई हैं जिसमें कहा जा रहा है कि ईरान पर जल्द ही हमला हो सकता है। अमेरिका और इजरायल की सेनाएं संयुक्त रूप से इस अभियान में शामिल हो सकती है। तनाव के बीच बिगड़ते हालात को देखते हुए कई देश ईरान से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने में लग गए हैं। 

‘तुरंत छोड़ दें ईरान’

इसी क्रम में पोलैंड के प्रधानमंत्री ने गुरुवार को ईरान में रह रहे अपने नागरिकों से तुरंत वहां से निकलने के लिए कह दिया है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि ईरान में मौजूद पोलिश नागरिकों को तुरंत निकल जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि हथियारों से लैस लड़ाई की संभावना के कारण कुछ ही घंटों में निकलना मुमकिन नहीं होगा। टस्क ने कहा, “प्लीज तुरंत ईरान छोड़ दें, किसी भी हालत में इस देश में ना जाएं।

क्या है ईरान का रुख?

अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने सख्त रुख अपनाया है। ईरान के एटॉमिक एनर्जी संगठन के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने कहा है कि कोई भी देश इस्लामिक रिपब्लिक को न्यूक्लियर एनरिचमेंट के उसके अधिकार से वंचित नहीं कर सकता। गुरुवार को एतेमाद डेली में प्रकाशित एक वीडियो के अनुसार, इस्लामी ने कहा, “न्यूक्लियर इंडस्ट्री की बुनियाद एनरिचमेंट है। न्यूक्लियर प्रक्रिया में आप जो भी करना चाहें, उसके लिए न्यूक्लियर फ्यूल की आवश्यकता होती है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के नियमों के अनुरूप चल रहा है और कोई भी देश ईरान को इस तकनीक से शांतिपूर्ण उपयोग के अधिकार से वंचित नहीं कर सकता। 

ट्रंप ने दिया हमले का संकेत

मोहम्मद इस्लामी का यह बयान मंगलवार को जिनेवा में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच ओमान की मध्यस्थता वाली अप्रत्यक्ष बातचीत के दूसरे दौर के बाद आया है। इस बीच बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर फिर से ईरान पर हमले का संकेत दिया था। वॉशिंगटन बार-बार ईरान से जीरो एनरिचमेंट की मांग कर रहा है। पश्चिमी देश ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश का आरोप लगाते हैं, जबकि तेहरान इन आरोपों से इनकार करता है और सिविलियन उद्देश्यों के लिए न्यूक्लियर तकनीक पर अपने अधिकार पर अडिग है। इन सबके बावजूद ट्रंप प्रशासन ईरान पर समझौते के लिए दबाव बढ़ा रहा है। 

अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य ताकत

तनाव के बीच अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत की है, जिसमें जनवरी में एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसकी एस्कॉर्ट जहाजों को गल्फ में तैनात किया गया था। इसके अलावा एक और एयरक्राफ्ट कैरियर भी भेजा गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान से 2 हफ्तों के भीतर विस्तृत प्रस्ताव पेश करने को कहा है। इजरायल ने भी अपनी सेनाओं को युद्ध की तैयारी में रखने की बात कही है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा है जबकि दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता भी जारी है।

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