
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता
नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज कहा कि केवल बीजेपी ही एक ऐसी अकेली पार्टी है जो राजनीति में महिलाओं का परवाह करती है। उन्होंने कहा, “इंदिरा गांधी पीएम थीं, पर उनके मंत्रालय में एक भी महिला और नहीं थी। उन्होंने उनके रहते हुए कांग्रेस में किसी और महिला को बढ़ने नहीं दिया, आप याद करके देख लीजिए। आज कोई और महिला बढ़ी है, तो उनके खानदान की बढ़ी है।”
अहम पदों पर महिलाएं
दिल्ली की मुख्यमंत्री ने कहा, “यह हमारी पार्टी थी जिसने हमारे प्रधानमंत्री की वजह से पार्लियामेंट में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण बिल पास करवाया… किस दूसरी पार्टी में ऐसा कानून लाने की हिम्मत और विल पावर थी? आज महिलाएं राष्ट्रपति से लेकर मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री तक के पदों पर हैं। हमारी पार्टी के अलावा किसी और पार्टी ने महिलाओं को ऐसे ज़िम्मेदार पदों के लिए आगे नहीं आने दिया…यह हमारी पार्टी है जिसने उज्ज्वला और स्वच्छता जैसे महिला-केंद्रित कार्यक्रम और महिला-केंद्रित गवर्नेंस को बढ़ावा दिया, और मैं खुद इसका एक ‘साक्षात’ उदाहरण हूं। मुझे नेशनल कैपिटल का मुख्यमंत्री बनाया गया और मुझे काम करने का मौका और पूरी आज़ादी दी गई।”
ममता बनर्जी की आलोचना
रेखा गुप्ता ने राष्ट्रपति पद के प्रोटोकॉल और गरिमा का अपमान के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना की। राष्ट्रपति जब पिछले हफ़्ते राज्य के दौरे पर आईं थीं तो ममता बनर्जी पर आरोप लगा था कि उन्होंने राष्ट्रपति के पद की गरिमा का अपमान किया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री ने कहा, “संवैधानिक गरिमा बनाकर रखना बहुत जरूरी है। यह फील्ड ऐसी है, जहां प्रोटोकॉल और संविधान की पोस्ट, उसकी गरिमा जरूरी है। उसमें पार्टी पॉलिटिक्स कहीं नहीं आती। राष्ट्रपति देश की प्रथम नागरिक हैं और वह सम्मान की अधिकारी हैं। मैं समझती हूं, जब राष्ट्रपति जी गईं उनके राज्य में, तो ममता बनर्जी का दायित्व बनता था कि उस प्रोटोकॉल को उसी नजरिए से देखें। कभी यह राजनीति का विषय नहीं होना चाहिए। राष्ट्रपति जी एक सामाजिक कार्यक्रम में गई थीं, तो जरूर आपको व्यवस्थाएं देनी थी, इसमें कहीं ना कहीं उनसे चूक हुई है और यह उनकी गलती भी है।”
इससे पहले, रेखा गुप्ता ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में लिखा था, “लाखों संथाल भाइयों और बहनों को उनकी अपनी संस्कृति के जश्न में हिस्सा लेने से रोकना, जबकि माननीय राष्ट्रपति खुद मौजूद थीं, आदिवासी गौरव और भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है। ममता सरकार को इस शर्मनाक घटना के लिए जवाब देना चाहिए। हमारी संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को तुच्छ राजनीति की बलि नहीं दी जा सकती।”
कौन हैं पसंदीदा महिला पॉलिटिशियन?
यह पूछे जाने पर कि वह अपनी पसंदीदा महिला पॉलिटिशियन किसे मानती हैं, रेखा गुप्ता ने जवाब दिया: “फेवरेट फीमेल पॉलिटिशियन, सुषमा स्वराज जी। बहुत ही प्यारा व्यक्तित्व, उनके साथ बहुत काम करने का मौका मिला, वह सौम्य थीं, उतनी ही प्रतिभाशाली थी। विदेश मंत्रालय जैसा कठिन मंत्रालय संभाला, राजनीति में महिलाओं के लिए वह हमेशा आइकॉन रही हैं।”
यह पूछे जाने पर कि उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारे में “बेटी बढ़ाओ, लड़के को समझाओ” क्यों जोड़ा, रेखा गुप्ता ने जवाब दिया: “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ, लड़के को समझाओ। यस.. श्योर। जिस तरीके से समाज में दुर्घटनाएं होती हैं और ऐसे पाप सुनकर ग्लानी महसूस होती है, तो ये बी लगता है कि वह भी तो किसी का बेटा है। एक बेटी जो शिकार बनी, किसी के बेटे ने ही उसके साथ गलत काम किया। मैं कहती हूं, वो बेटा हमारे घर से न हो, इसलिए हर परिवार को अपने बेटे को do’s and don’ts (क्या करना है और क्या नहीं करना है) बताने पड़ेंगे। जब हम अपनी बेटी को do’s and don’ts बताते हैं, तो बेटे को भी ज़रूर बताना चाहिए कि उसे क्या-क्या नहीं करना चाहिए, और क्या क्या करना चाहिए। जब हर परिवार में वह संस्कार होंगे, तब समाज में वह सब होना बंद होगा, जब कहीं दुर्घटना होती है और पूरा समाज उससे शर्मिंदा होता है। इसलिए बेटों और बेटियों को क्या करना है, दोनों को समझाने की ज़िम्मेदारी मां-बाप पर है।”
