टाटा संस और टाटा ट्रस्ट ने इस ट्रस्ट के लिए ₹250-₹250 करोड़ की प्रतिबद्धता जताई है।

Photo:PTI टाटा संस और टाटा ट्रस्ट ने इस ट्रस्ट के लिए ₹250-₹250 करोड़ की प्रतिबद्धता जताई है।

टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया विमान हादसे के पीड़ितों की मदद के लिए ₹500 करोड़ का ट्रस्ट बनाने का शुक्रवार को ऐलान किया। इसका नाम- AI-171 मेमोरियल एंड वेलफेयर ट्रस्ट होगा। इसके जरिये पीड़ितों को तत्काल और दीर्घकालिक सहयोग मिलेगा। पीटीआई की खबर के मुताबिक, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट ने इस ट्रस्ट के लिए ₹250-₹250 करोड़ की प्रतिबद्धता जताई है। यह ट्रस्ट मुंबई में सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में रजिस्टर किया गया है। अहमदाबाद में हुए इस हादसे में पिछले महीने 260 लोगों की जान गई थी।

किस-किस को मिलेगी मदद

खबर के मुताबिक, टाटा संस ने एक बयान में कहा कि यह ट्रस्ट मृतकों के आश्रितों, घायल व्यक्तियों और इस हादसे से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित सभी लोगों को तत्काल और दीर्घकालिक सहायता प्रदान करेगा। इसके अलावा, ट्रस्ट उन प्रथम उत्तरदाताओं, चिकित्सा एवं आपदा राहत कर्मियों, समाजसेवकों और सरकारी कर्मचारियों को भी सहायता प्रदान करेगा, जिन्होंने हादसे के बाद अहम योगदान दिया और सेवा की।

ट्र्स्ट किस तरह करेगा सहायता?

AI-171 मेमोरियल एंड वेलफेयर ट्रस्ट का संचालन 5 सदस्यों वाली बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज करेगी। इनमें पूर्व टाटा अधिकारी एस पद्मनाभन और टाटा संस के जनरल काउंसल सिद्धार्थ शर्मा को ट्रस्टी नियुक्त किया गया है। शेष तीन ट्रस्टियों की नियुक्ति जल्द की जाएगी। ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य हादसे में मृतकों के परिजनों को ₹1 करोड़ की अनुग्रह राशि देना, गंभीर रूप से घायल लोगों के लिए चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना, अहमदाबाद स्थित बी. जे. मेडिकल कॉलेज के क्षतिग्रस्त हॉस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण में सहयोग करना है।

12 जून को अहमदाबाद में हुआ था हादसा

बयान के अनुसार, ट्रस्ट को जरूरी टैक्स रजिस्ट्रेशन और ऑपरेशनल औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद पूरी गंभीरता से अमल किया जाएगा। बता दें, 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट (Boeing 787-8) उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही एक इमारत से टकरा गई थी। इस भयावह दुर्घटना में 260 लोगों की मौत हुई, जिनमें 19 लोग जमीन पर मौजूद थे। विमान में कुल 242 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें से सिर्फ एक व्यक्ति ही जीवित बच पाया।

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