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Image Source : X.COM/INDIANNAVY
INS त्रिकंद इस समय मॉरीशस में है।

INS Trikand News​: भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS त्रिकंद मॉरीशस के 58वें राष्ट्रीय दिवस के जश्न में शामिल हो रहा है। गुरुवार को चैंप डी मार्स में होने वाली नेशनल डे परेड में शिप के सदस्य मार्च करेंगे और साथ ही लोगों को नेवी बैंड का प्रदर्शन और शिप के हेलीकॉप्टर का फ्लाई-पास्ट देखने को मिलेगा। INS त्रिकंद 10 मार्च को पोर्ट लुईस पहुंच चुका है, और यह दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी नियमित तैनाती का हिस्सा है। जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कप्तान सचिन कुलकर्णी मॉरीशस सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और मॉरीशस कोस्ट गार्ड के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। मारीशस और मालदीव में हालिया विवाद के बीच INS त्रिकंद की यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आखिर क्या है INS त्रिकंद की यात्रा का मकसद?

मॉरीशस के खास दिन को यादगार बनाने के लिए पोर्ट लुईस पहुंचा INS त्रिकंद अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया है। INS त्रिकंद के इस प्रवास के दौरान भारतीय नौसैनिकों और स्थानीय लोगों के बीच क्रॉस ट्रेनिंग, दोस्ताना खेल मुकाबले और सामुदायिक कार्यक्रम भी होंगे। भारतीय नौसेना के मुताबिक, यह यात्रा समुद्री सहयोग बढ़ाने, दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र में भारत-मॉरीशस के रिश्तों को और गहरा करने के उद्देश्य से की गई है। बता दें कि मॉरीशस और भारत के बीच दशकों पुराने रिश्ते हैं और इस देश की आबादी में भारतवंशियों का बहुमत है।

कई खासियतों से लैस है युद्धपोत INS त्रिकंद

भारतीय नौसेना का यह युद्धपोत कई खासियतों से लैस है। आइए, इसकी कुछ विशेष खासियतों के बारे में जानते हैं:

  • तलवार क्लास का स्टील्थ फ्रिगेट (रूस में बना, 2013 में कमीशन)
  • लंबाई 124.8 मीटर, वजन 4,035 टन, स्पीड 30 नॉट
  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, श्टिल एयर डिफेंस मिसाइल, 100mm तोप और टॉरपीडो से लैस
  • ‘स्टील्थ’ क्षमता से लैस अत्याधुनिक जहाज
  • एक हेलीकॉप्टर ले जाने की क्षमता
  • दुश्मन के जहाज, विमान और पनडुब्बी तीनों से लड़ने में माहिर
  • 180 नाविकों की टीम के साथ लंबे समय तक समुद्र में रह सकता है 

मॉरीशस और मालदीव में बढ़ा हुआ है तनाव

बता दें कि फरवरी 2026 में मॉरीशस और मालदीव के बीच बड़ा कूटनीतिक विवाद छिड़ गया था। मॉरीशस ने चागोस द्वीप समूह पर अपनी संप्रभुता को मालदीव द्वारा न मानने और ब्रिटेन के साथ हुए समझौते पर आपत्ति जताने के कारण मालदीव के साथ सभी राजनयिक संबंध तुरंत तोड़ लिए थे। मॉरीशस का कहना है कि यह कदम अपने राष्ट्रीय हित और अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा के लिए उठाया गया। वहीं मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने इसे ‘अनुचित और अपरिपक्व’ बताया था। चागोस द्वीप ब्रिटेन के कब्जे से मॉरीशस को वापस मिलने वाला है, लेकिन मालदीव इस पर अपना दावा जताता रहा है जिससे हिंद महासागर के इस इलाके में तनाव बढ़ गया है।

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